चलन से बाहर हुए नोट को जमा करने और नए नोट हासिल करने को बैंक और डाकखाना मेें लोग उमड़ रहे हैं। कुछ ही देर में नई नोट फुर्र हो जाने से दोपहर होते होते बैंकों में सन्नाटा पसर जा रहा है। ग्रामीण बैंकों की हालत और भी खराब है क्योंकि यहां पर नाममात्र रकम आ रही है। जो लाइन में लगने वाले 10 फीसदी ग्राहकों को भी नहीं मिल पा रही है। तमाम बैंकों के एटीएम सूखे पड़े हैं। जिनके हाथ नए नोट अब तक नहीं लगे हैं वह भी हलाकान है और जिनके पास है, वह भी। दो हजार की नोट को ग्रामीणांचल की बजारों में लेने से दुकानदार मना कर रहे हैं। इससे यह नोट फिलहाल जेब की नुमाइश बन कर रह गई है। जिनके घर में शादी और विवाह होने हैं वह मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं। ग्रामीणांचल में नए नोट को लेकर मचे हाहाकार की हकीकत उजागर करती एक रिपोर्ट।
मानसिक आघात में शहनाई वाले परिवार
अमौली(फतेहपुर)। नोटबंदी ने शहनाई बजने वाले परिवारों में बेचैनी बढ़ा दी है। हालांकि अब उनके खाते से ढाई लाख मिलने का आदेश हो चुका है। अभी जिले में बैंक अफसरों के पास यह शुक्रवार तक ही पहुंच सकेगा। जेबें खाली होने से इन परिवारों के मुखिया मानसिक आघात के दौर से गुजर रहे हैं। किसी को दरवाजे आने वाली बारात की आवभगत की चिंता है तो किसी को बारात उठाने की। खूंटाझाल के राम किशोर वर्मा को बेटी मनीषा का तिलक 24 नवंबर को ले जाना है। इसके बाद 28 नवंबर को बारातियों और जनातियों की दरवाजे पर खातिरदारी करनी है। उनका कहना है कि ढाई लाख में भी क्या हो पाएगा? लिहाजा जैसे जैसे दिन नजदीक आते जा रहे हैं दिल की धड़कन तेज होती जा रही है। बुढ़वा गांव की सीता देवी की बेटी प्रतीक्षा का विवाह 22 नंवबर को है। वह सप्ताह भर से लगातार बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की परिक्रमा कर रही है लेकिन नोट बदलने में सफल नहीं हो सकी है। बिजौली गांव के रमेश प्रजापति को भी बिटिया के हाथ पीले करने है। बेटी सुमन का विवाह 21 नवंबर को होना है। यह भी हर रोज बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक अमौली आ रहे हैं लेकिन जेब में नई नोट अब तक नहीं आ सकी है। गोविंदपुर बिलारी के रामबली की बेटी का विवाह 28 नवंबर को है। बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक अमौली से यह हर दिन निराश होकर लौट रहे हैं। बैंक के हालात देखकर लोग रिश्तेदारों, पड़ोसियों और साहूकारों की शरण में जाने को मजबूर हैं। रिठवां के रहने वाले इंद्रपाल भी कम तनाव मेें नहीं। इनके बेटे नरेंद्र की बारात हालांकि तीन दिसंबर को है लेकिन जिस तरह से नोट को लेकर हाहाकार मचा है उससे यह भी परेशान हैं।
आ ही नहीं पा रहे ज्यादा नोट
जाफरगंज(फतेहपुर)। ग्रामीणांचल की बैंक और डाकखानों के खजाने भरते ही कुछ ही घंटे में खाली हो जा रहे हैं। हालात यह है कि कहीं पर सप्ताह भर बाद पैसा आया तो कहीं गुरुवार भी लाइन में लगे लोग बिना पैसा के मायूस लौट गए। बरुवा स्थित बड़ौदा उ.प्र. ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक वीके सिंह कहते हैं कि आठ नवंबर के बाद बुधवार की शाम को दो लाख का कैश आया था जो गुरुवार बैंक खुलने के दो घंटे बाद खत्म हो गया। इसे सिर्फ 200 ग्राहकों को ही दिया जा सका। जाफरगंज स्थित बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के मैनेजर आरके सिंह ने भी बुधवार की शाम दो लाख मिलने की बात स्वीकारी। कहा कि दो हजार की नोट मिलने से नाममात्र ग्राहकों में यह वितरित कर दी गईं। मैनेजर ने बताया कि उन्होंने आरएम से दो हजार की नोट के बजाय छोटी नोट भिजवाने का आग्रह किया है। गहरूखेड़ा स्थित बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के मैनेजर दीपक सिंह ने बताया कि उनकी शाखा मेें अभी तक रुपया नहीं आया है। ऐसे में ग्राहकों को केवल रुपया जमा किया जा रहा है।
कैश लेने कानपुर गए मैनेजर
औंग(फतेहपुर)। सप्ताह भर का वक्त बीतने के बावजूद बैंकों की सेवाएं रफ्तार नहीं पकड़ पा रही हैं। बैंक का खजाना अपर्याप्त है तो एटीएम मशीन रुपये से खाली। कस्बे में आंध्रा बैंक, ओरियंटल बैंक और बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की शाखाएं हैं। सप्ताह भर से यह तीनों ब्रांचें नए नोट नहीं दे पा रही हैं। आंध्रा व ओरियंटल बैंक के एटीएम भी लगे हैं लेकिन इनमें रुपयों का अकाल बना है। इन दोनों बैंकों का गुरुवार को भी शटर नहीं उठ सका। ओरियंटल बैंक के मैनेेजर कैश के सिलसिले में कैशियर अरुण के साथ बैंक की कानपुर के सिविल लाइन्स में स्थित मेन ब्रांच गए। इनके लौटने का ग्राहक इंतजार करते रहे। तमाम ग्राहक हताश होकर बिना रुपये के घर लौट गए। उधर, बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के मैनेजर अनूप चौरसिया अवस्थ होने के चलते गुरुवार शाखा नहीं पहुंचे। नाराज ग्राहकों को समझाना कर्मियों के लिए मुश्किल पड़ा।
दो हजार का नोट लेकर जाएं कहां
फतेहपुर। पांच सौ और एक हजार के नोट प्रतिबंधित होने के बाद बैंक और डाकखाना से थमाए जाने वाले दो-दो हजार के नोट को चलाना मुश्किल हो रहा है। शहर की पॉश बाजारों में यह नोट देखकर दुकानदार बिदक रहे हैं। जाफरगंज के राजेश कुमार कहते हैं कि उनकी जेब में दो हजार का नोट तीन दिन से पड़ा है। जिस दुकान जाते हैं, दुकानदार देखते ही इसे फिर से अंदर रखने की राय तुरंत दे डालते हैं। अच्छा होता कि बैंक और डाकखाना में ग्राहकों को सौ-सौ की नोट दी जाती, जिससे रोजमर्रा की वस्तुएं तो घर तक पहुंचती। गहरूखेड़ा के अरविंद भी दो हजार की नोट से ज्यादा तसल्ली मेें नहीं है। इनका कहना है कि गांव में कुछ दुकानें होती हैं। बिक्री भी मामूली होती है। यहां पांच सौ और हजार के नोट चलाना मुश्किल था। अब सरकार ने दो हजार की नोट चलन में लाकर और बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है।
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