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मंडी के आढ़तियों का धंधा हुआ मंदा

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मंडी के अंदर किसानों से खरीद करने पर टैक्स देने के केंद्र सरकार के नए अध्यादेश से आढ़तियों का धंधा मंदा हो गया है। मंडी के बाहर से खरीदने और बेचने का कारोबार बढ़ रहा है।
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इससे प्रशासन को मंडी शुल्क के नाम पर मिलने वाले राजस्व में भी कमी आई है। सुस्त व्यापार को लेकर आढ़तियों की चिंता बढ़ गई है और उन्होंने सरकार के इस नए अध्यादेश का विरोध करना शुरू कर दिया है।
मंडी परिषद अधिनियम में मुफ्त व्यापार से जहां बिना लाइसेंस कारोबार करने वालों को फायदा हुआ है वहीं परिषद में शुल्क जमा कर दुकानों को एलाट कराने वाले आढ़तियों का कारोबार मंदा हो गया है।
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मंडी में किसानों से सब्जी व गेहूं, चावल खरीदने वाले व्यापारियों को दो प्रतिशत मंडी शुल्क और आधा प्रतिशत विकास शुल्क जमा करना पड़ रहा है। ऐसे में व्यापारियों ने मंडी से खरीदारी करना बंद कर दिया है।
सरकार की इस नई व्यवस्था से करोड़ों रुपये का राजस्व भी प्रभावित हो रहा है। बिंदकी मंडी की बात की जाए तो यहां आढ़ती हर महीने डेढ़ करोड़ का राजस्व जमा करते थे। मुफ्त व्यापार नियम लागू होने के बाद महीने मेेें मात्र 25 से 30 लाख रुपये जमा हो रहे हैं।
गल्ला कारोबारी पंकज गुप्ता ने बताया कि मुफ्त व्यापार जबसे लागू हुआ है मंडी में आवक कम हो गई है। बाहर से खरीदारी करने में व्यापारियों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है।
यहां से किसानों के उत्पाद खरीदने में ढाई प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है। इससे व्यापारियों ने मंडी आना कम कर दिया है।
बिंदकी मंडी के आढ़ती योगेंद्र सिंह ने कहा कि पहले मंडी में रोज 300 क्विंटल से अधिक की रोज खरीदारी होती थी।
मंडी के बाहर मुफ्त व्यापार जबसे किया गया है। मात्र 100 से 150 क्विंटल की आवक बची है। किसानों के घर में ही जाकर व्यापारी खरीद ले रहे हैं।
गल्ला व्यापारी संतोष कुमार का कहना है कि मंडी से अन्य प्रदेश में माल भेजने में केंद्र सरकार ने तो सभी टैक्स माफ कर दिए, लेकिन प्रदेश सरकार ने मंडी के अंदर से व्यापार पर टैक्स में बदलाव नहीं किया है।
वहां पहले की तरह ही शुल्क देना पड़ रहा है। इससे बाहरी व्यापारी बाहर से ही खरीदारी करते हैं।
गल्ला आढ़ती अनुपम गुप्ता का कहना है कि हथगाम, असोथर, थरियांव, धाता, छिवलहा से व्यापारी खरीदारी करते हैं।
उनको कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है। मंडी में लाखों रुपये की दुकान लेने के बाद पहले की तरह ही टैक्स देना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार को इसे खत्म करना चाहिए।
मंडी सचिव उमेश कुमार अवस्थी ने बताया कि जबसे मुफ्त व्यापार लागू हुआ है। मंडी के राजस्व में 80 फीसदी कमी आई है। ज्यादातर व्यापारी मंडी के बार से अपना कारोबार करने लगे हैं।
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