नए सत्र में जिले में चार मॉडल स्कूल संचालित होंगे।
इनके भवन बनकर तैयार हो चुके हैं। स्कूलों का संचालन अनुभव प्राप्त
संस्थाएं करेंगी। हालांकि अभी दो स्कूल पठन पाठन के लिए बनकर तैयार नहीं
है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष 2010-11 में जिले में आधा
दर्जन ब्लाकों में मॉडल स्कूल स्वीकृत किए थे। इनमें हंसवा ब्लाक का
दनियालपुर, बहुआ, ऐरायां ब्लाक में ऐलई, भिटौरा ब्लाक में लतीफपुर,
तेलियानी में अलादातपुर, हथगाम ब्लाक क्षेत्र में अंबिलिहापाल में स्कूलों
के निर्माण के लिए हरी झंडी मिली थी।
शासन ने कार्यदायी संस्था पैकफेड को
स्कूलों की लागत तीन करोड़ दो लाख के सापेक्ष दो करोड़ 71 लाख 80 हजार की
धनराशि प्रति स्कूल के हिसाब से आवंटित कर दी थी। इनमें दनियालपुर, बहुआ,
ऐलई, अलादातपुर एक साल से बनकर तैयार हैं, जबकि अंबिलिहापाल और लतीफपुर का
निर्माण करीब 85 प्रतिशत पूरा हो पाया है।
चौदह कक्षों वाले मॉडल स्कूलों
में सीबीएसई बोर्ड से कक्षा छह से 12 तक की कक्षाएं संचालित होंगी।
प्रत्येक कक्षा में दो सेक्शन चलेंगे। स्कूल की प्रवेश क्षमता 560 बच्चों
की है। स्कूल में स्पोर्ट्स, योगा, स्किल डेवलपमेंट, संगीत, कंप्यूटर,
अनिवार्य बालचर योजना आदि सुविधाएं होंगी।
मॉडल स्कूलों का संचालन पहले
सरकार के आधीन होना था, लेकिन अब शासन ने माडल स्कूलों को किराए पर चलाने
का निर्णय लिया है। दिसंबर 2015 में शासन ने अनुभव प्राप्त संस्थाओं से
स्कूल चलाने के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगा था। यह आवेदन शासन स्तर पर
विचाराधीन हैं।
सहायक लेखाधिकारी आनंद विक्रम सिंह ने बताया कि मॉडल स्कूल
नए सत्र में हर हालत में चालू हो जाएंगे। जिले की कई शिक्षा से संबंधित
संस्थाओं ने आवेदन कर रखा है। शासन चालू महीने के अंत तक स्कूलों का आवंटन
करने की तैयारी में है।
किराए पर लेने वाली संस्था स्कूल में संसाधन जुटाकर
बच्चों का प्रवेश लेगी। उन्होंने बताया कि अभी तक स्कूल संचालन में शासन
की क्या भूमिका होगी। यह स्थिति साफ नहीं है।