परिषदीय स्कूलों में दोपहर को खाने की तो व्यवस्था है लेकिन पीने के लिए पानी का इंतजाम नहीं हैं। बच्चे मिडडे मील स्कूल में खाने के बाद पानी पीने घर जाते हैं। कुछ बच्चे बोतलों में पानी लेकर स्कूल आते हैं। परिषदीय स्कूलों की पेयजल व्यवस्था का यह कड़वा सच है।
नगर क्षेत्र के प्राथमिक स्कूल आबूनगर सेकेंड का हैंडपंप काफी अरसे से खराब है। हैंडपंप के आसपास मलवा डंप कर दिया गया है। यह हैंडपंप बेसिक शिक्षा विभाग के रिकार्ड में कंडम हो चुका है। स्कूल में प्रतिदिन 50 से 60 बच्चों के लिए एमडीएम पकता है। रसोइयों को खाना पकाने के लिए दूर से पानी लाना पड़ता है।
बच्चे खाना खाने के बाद पानी पीने के लिए घर चले जाते हैं। कुछ बच्चे बोतलों में पानी साथ लेकर आते हैं। आदर्श प्राथमिक स्कूल खेलदार में हैंडपंप लगने के बाद शायद महीनेभर भी नहीं चला। चार साल पहले हैंडपंप लगाने के बाद जलनिगम ने इधर घूमकर नहीं देखा। इस स्कूल में प्रतिदिन एक सैकड़ा बच्चों के लिए एमडीएम पकाया जाता है।
हैंडपंप खराब होने के कारण बच्चों को कुछ फासले पर स्थित पूर्व माध्यमिक स्कूल के हैंडपंप में पानी पीने जाना पड़ता है। प्राथमिक स्कूल मसवानी सेकेंड का हैंडपंप दो साल से बंद है। यहां पर प्रतिदिन 70 से 80 बच्चों के लिए एमडीएम पकाया जाता है।
यहां के कुछ बच्चे बोतलों में पानी लेकर स्कूल आते हैं या फिर एमडीएम खाने के बाद दूर मंदिर में लगे हैंडपंप में पानी पीने जाते हैं। यह स्कूल तो बानगी के तौर पर हैं। वर्तमान समय में जिले के 690 स्कूलों में हैंडपंप खराब हैं या फिर लगे नहीं है।
बेसिक शिक्षा विभाग के अभिलेखों की मानें, तो 368 प्राथमिक स्कूलों के हैंडपंप रिबोर के लिए चिह्नित हैं, जबकि 84 स्कूलों में अभी तक हैंडपंप लगाए ही नहीं गए हैं। इसी प्रकार 138 उच्च प्राथमिक स्कूलों के हैंडपंप रिबोर के लिए चिह्नित हैं, जबकि 100 स्कूल अभी तक हैंडपंप विहीन हैं।
इन स्कूलों के बच्चे स्कूल में मिड डे मील खाते हैं और पानी पीने के लिए दर-दर की ठोकरें खाते हैं। एमएल वर्मा, जिला समन्वयक निर्माण जिले के 2,650 परिषदीय स्कूलों में 690 स्कूल ऐसे हैं, जहां या तो हैंडपंप ही नहीं है अथवा हैंडपंप स्थायी रूप से खराब हैं। इन स्कूलों में हैंडपंप लगाने के लिए जलनिगम को सूची भेजी गई है।