फतेहपुर सर्राफा एसोसिएशन की बैठक चौक हनुमान मंदिर में हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ उपाध्यक्ष बृजेश सोनी ने कहा कि पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट बंद होने के बाद लोगों को दिक्कत हो रही है। कहा कि सराफा कारोबार भी पूरी तरह चौपट हो गया है। बैंकों में अव्यवस्था हावी है। कैश न होने से दिक्कत आ रही है। जब से नोटबंदी हुई करोड़ों रुपये का कारोबार नहीं हो पाया। कोषाध्यक्ष मोनू रस्तोगी ने कहा कि बैंक में चेक लगाना हो या फिर बैंक स्टेटमेंट लेना हो उसके लिए लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है। बैठक में संजीव रस्तोगी, साकेत गुप्ता, अतीश रस्तोगी, दीपू, अमन, केशन, गोपाल दीक्षित, राजेंद्र वर्मा, राजीव गुप्ता, नफीस अहमद, शोएब, महताब, रामनरेश, उमेश सोनी, रामदास सोनी, दिनेश सोनी, पप्पी रस्तोगी मौजूद रहे।
बैंकों में कैश कम, कहां जाएं ग्रामीण
खागा(फतेहपुर)। क्षेत्र में प्रेमनगर, हथगाम, छिवलहा, गौंती, खखरेरू, रक्षपालपुर, किशनपुर, विजयीपुर, नरैनी, धाता में विभिन्न बैकों की शाखाएं हैं। यहां पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण कैशियर, शाखा प्रबंधक खागा या फतेहपुर स्टेट बैंकों से प्रतिदिन सुबह कैश लेकर शाखा जाते हैं। बहुत कम कैश इन बैंक शाखाओं में रहता है। ऐसे में स्टेट बैंक ग्रामीण क्षेत्र की बैंकों को कैश देने के नाम पर अभी तक सिर्फ औपचारिकता पूरी कर पाए हैं। सप्ताहभर से अधिक का अरसा गुजर चुका है, लेकिन किसी भी बैंक में तीन से चार लाख रुपये मिल पाए हैं। हालांकि खागा कस्बे की एसबीआई शाखा में रुपये बदले को लेकर लाइन लगी थी, लेकिन अन्य दिनों की अपेक्षा कम थी।
लिंक शाखाओं से भुगतान शुरू
धाता में भारतीय स्टेट बैंक, बैंक आफ बड़ौदा की शाखाओं से शुक्रवार को सभी उपभोक्ता रुपये लेकर लौटे। दोनों बैंकों की लिंक शाखाओं के रुपये बदलने का काम शुरू होने के कारण शाखाओं में अधिक भीड़ नहीं थी। लिंक शाखाओं के माध्यम से पांच सौ से लेकर 2000 रुपये तक कैश की अदला-बदली के साथ निकासी भी की गई। क्षेत्र में अभी तक शादी समारोहों वाले घरों में रुपये की आवश्यकता पूरी नहीं हो रही है। बैंक शाखाएं उन्हें रिजर्व बैंक जाकर भुगतान लेने की सलाह दे रही हैं।
कोआपरेटिव और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सूनी
कैश की अदला-बदली के लिए भूमि विकास बैंक और कोआपरेटिव बैंक अधिकृत नहीं हैं और न ही इन बैंकों को रुपया ही नहीं मिल रहा है। इनकी तिजोरियां खाली हो चुकी हैं। इनके उपभोक्ता धन जमा होने के बावजूद निराश होकर लौट रहे हैं। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक नरैनी के उपभोक्ता लोधौरा निवासी रामसेवक ने बताया कि पैसा निकलने आया था, लेकिन उसे पैसा न होने के कारण वापस लौटना पड़ा।
नहीं मिला पैसा, लौटी कांग्रेस नेत्री
कांग्रेस की प्रांतीय नेत्री ऊषा मौर्या गुरुवार को प्रेमनगर स्थित इलाहाबाद बैंक शाखा रुपये निकालने आई। बैंक में लाइन लगी थी, उन्होंने बैंक के अंदर जाने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो पाई। कुछ देर बाद कैश खत्म हो गया, जिससे उन्हें खाली हाथ वापल लौटना पड़ा।
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दो से तीन हजार का भुगतान
बैंक बड़ौदा शाखा किशनपुर में शुक्रवार को आम दिनों की तरह भीड़ थी। अभी तक शाखा में खाताधारक को दो से तीन हजार रुपये का ही भुगतान दिया जा रहा है। मझगवां के किसान महेश कुमार ने बताया कि रुपयों का संकट इतना नहीं है, जितना लोग बता रहे हैं। संकट सिर्फ खुदरा नोटों का है, क्योंकि क्षेत्र के बहुतायत किसानों के पास 2000 के नोट पहुंच गए हैं। इन नोटों से सौ-दौ सौ का समान दुकानदार नहीं दे रहे हैं। यह गंभीर समस्या है। नोट के बदले में पूरा समान लेने के लिए दुकानदार दबाव बना रहे हैं।
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किसानों को नहीं मिल रहा केसीसी लोन
खखरेरू व्यवसायिक कस्बा है। यहां पर ग्रामीण बैंक की शाखा है। यहां बड़ा बाजार होने के कारण ज्यादातर व्यापारियों के सामने पुराने नोट जमा करने की समस्या थी, वह लगभग हल हो चुकी है। किसानों के सामने केसीसी से रुपया निकालने की समस्या है। नरैचा के दिनेश तिवारी, लोहारनपुर के गणेश मिश्रा, बरएपुर के बब्बू तिवारी ने बताया कि खखरेरू केसीसी से पैसा निकालने आए थे, लेकिन जरूरत के हिसाब से रुपये नहीं मिल रहे हैं। ऐसी हालत में खाद व बीज की खरीद नहीं हो पा रही है, जिससे फसल की बुआई पिछड़ रही है।