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दस नलकूप होंगे रिबोर, रिजर्व रहेंगी दस मोटरें

Sat, 09 Apr 2016 12:36 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
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Water problems will - फोटो : प्रतीकात्मक फोटो
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नगर पालिका परिषद ने पेयजल संकट से निपटने के लिए हर समय दस मोटरें स्टॉक में रखने का निर्णय लिया है। मोटर फुंकने पर आठ से दस घंटे में नलकूप दोबारा चालू हो जाएगा। घटी डिस्चार्ज क्षमता पूरी करने के लिए 10 पुराने नलकूपों की रिबोरिंग कराने के लिए जलनिगम को सूची भेजी गई है।
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शहर का भूगर्भ जलस्तर सौ फीट से अधिक नीचे खिसक जाने से शहर में लगे 47 नलकूपों में 10 ने पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया है। शेष 37 नलकूपों की डिस्चार्ज क्षमता घटकर 70 से 80 प्रतिशत हो गई है। ऐसे में शहरवासियों को पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी नहीं मिल रहा है। शहर के ऊंचाई वाले मोहल्लों में ज्यादा दिक्कत है।

सरायं और छोटी बाजार मोहल्लों में टैंकरों से पानी भेजा जा रहा है। बोर्ड की बैठक में पेयजल को लेकर हुए हंगामे के बाद नगर पालिका का ध्यान इस समस्या की ओर गया है। अभी तक कोई भी नलकूप फुंकने पर उसे ठीक करने में चार-पांच दिन लगता था।
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परिषद का दावा है कि अब आठ से 10 घंटे में नलकूप चालू करने के लिए परिषद हर समय स्टाक में 10 मोटरें तैयार रखेगा। इसके लिए 11 अप्रैल को मोटर मरम्मत का टेंडर होगा। इसके बाद सालों से कबाड़ में पड़ी डेढ़ दर्जन मोटरें ठीक कराई जाएंगी। इस काम में 15 दिन का समय लगेगा।

शहर के तांबेश्वर, जोनिहां चौराहा, रामगंज पक्का तालाब नए और सात पुराने नलकूपों का रिबोर कराने की तैयारी है। इन नलकूपों की सूची जलनिगम को भेज दी गई है। जलनिगम स्टीमेट तैयार करके नगर पालिका को भेजेगा। इसके बाद परिषद बजट अवमुक्त करेगी। सब ठीकठाक रहा, तो चालू महीने के अंत तक शहर के सभी ओवरहेड टैंकों की लोडिंग शुरू हो जाएगी। इसके बाद सुबह शाम रोस्टर के मुताबिक दो-दो घंटे जलापूर्ति दी जाएगी।

जलकल के अवर अभियंता गौरीशंकर पटेल का कहना है कि फुंकीं मोटरें ठीक होने के बाद सभी नलकूप चालू हो जाएंगे। इसके बाद सभी टंकियों की लोडिंग कराकर रोस्टर के मुताबिक जलापूर्ति शुरू की जाएगी। नगर पालिका परिषद की 78 लाख की धनराशि पानी में चली गई।

सालभर पहले हस्तांतरित नलकूप जोनिहां चौराहा, तांबेश्वर और रामगंज पक्का तालाब में लगे नलकूपों से जलापूर्ति बंद हो गई है। इनमें प्रत्येक नलकूप की लागत करीब 26 लाख है। इस तरह से तीनों नलकूपों की लागत 78 लाख होती है। इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बाद यह नलकूप एक साल भी जलापूर्ति नहीं कर पाए।
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