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डेड लाइन खत्म, स्वेटर वितरण में पीछे रह गया बेसिक शिक्षा विभाग

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ठंड दस्तक दे चुकी है, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग अभी तक 38.65 प्रतिशत बच्चों को स्वेटर नहीं बांट पाया है। शासन ने 31 अक्तूबर स्वेटर वितरण की अंतिम तिथि निर्धारित की थी। लेकिन अफसरों की लापरवाही के कारण सभी बच्चों तक स्वेटर नहीं पहुंच सके। स्कूली स्वेटर के भरोसे रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बिना गरम कपड़ों के ही ठंड का सामना करना पड़ रहा है।
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जिले में 2650 परिषदीय और 122 एडेड स्कूलों में कक्षा एक से लेकर आठ तक में पढ़ने वाले बच्चों को 31 अक्तूबर तक स्वेटर वितरित करने के लिए शासन ने आदेश जारी किया था। इन स्कूलों में दो लाख 44 हजार 282 बच्चे पंजीकृत हैं। इसके लिए जेम पोर्टल से निविदा कराई गई थी, जिसमें रायबरेली की फर्म आस्था ट्रेडर्स को आपूर्ति करने की जिम्मेदारी मिली थी। इस संस्थान ने 164 रुपये 90 पैसे प्रति स्वेटर की दर से स्वेटरों की आपूर्ति करने का एग्रीमेंट किया था। लेकिन स्वेटर वितरण में संस्था पीछे रह गई। जिले के अभी तक 38.65 फीसदी बच्चों को स्वेटर नहीं मिल सके हैं। खास बात यह है कि इन स्कूलों में ज्यादातर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे ही पढ़ते हैं। यह परिवार कोरोना के कारण आर्थिक रूप से और अधिक कमजोर हो चुके हैं। ऐसे में इन बच्चों को स्कूल से मिलने वाली स्वेटर का ही सहारा है।
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