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स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल, मरीज बेहाल

Wed, 21 Sep 2016 12:48 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
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सदर अस्पताल में धरना देते स्वास्थ्य कर्मी - फोटो : अमर उजाला
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संयुक्त राज्य चिकित्सा कर्मचारी संघ के आह्वान पर फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, डेंटल  हाइजिनिस्ट आटोमैटिक्स डिपार्टमेंट से जुड़े स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी-अपनी मांगाें को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल कर दी। विभागीय अफसरों व प्रशासनिक अफसरों से वार्ता के बावजूद विरोध खत्म नहीं हो सका।
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सदर अस्पताल में संघ की अध्यक्ष गीता सिंह की अगुवाई में धरना प्रदर्शन हुआ। हड़ताली कर्मचारी प्रदेश सरकार के खिलाफ बरसते रहे। संरक्षक सुभाष चंद्र सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मी नहीं चाहते हैं कि मरीजों को तकलीफों का सामना करना पड़े लेकिन सरकार का रवैया ऐसा करने को मजबूर कर रहा है।

मंत्री अरुणेश चंद्र सिंह ने मरीजों को हुई परेशानी का जिम्मेदार प्रमुख सचिव व मुख्य सचिव स्वास्थ्य को ठहराया। हड़ताल से न केवल ओपीडी से लेकर पैथोलॉजी की सेवाएं बाधित की बल्कि पोस्टमार्टम हाउस पर भी ताला लटका दिया गया। आपातकालीन सेवाएं नहीं मिल सकीं। पीएचसी और सीएचसी से लेकर सदर अस्पताल आए लोगों को लौटना पड़ गया।
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धरने में दिलीप सिंह, अशोक विश्वकर्मा, कैलाश नाथ वर्मा, एपी प्रजापति, एसपी सिंह, राम नरेश सिंह, अशोक सिंह, जितेंद्र सिंह, सर्वेश शुक्ला, अजीत सिंह, केसी उमराव, धर्म सिंह मौजूद रहे। उधर, मंगलवार से शुरू हुई स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से पोस्टमार्टम हाउस में लटके ताले को खुलवाने शाम को सीएमओ पहुंचे।

पोस्टमार्टम हाउस का काम ठप होने की जानकारी पाकर सीएमओ डॉ. विनय कुमार पांडेय सदर अस्पताल के सीएमएस डॉ. वीएन पाठक को लेकर सेवाएं बहाल करने के लिए आगे आए। नतीजा सकारात्मक रहा। आंदोलित पोस्टमार्टम कर्मियों ने सीएमओ के कहने पर शाम पांच बजे के बाद पोस्टमार्टम करना चालू किया।

सीएमओ ने बताया दो शवों का पोस्टमार्टम होना था। डॉ. इश्तियाक और डॉ. राजेश प्रजापति ने एक पोस्टमार्टम किया। एक शव का पोस्टमार्टम कागज न होने की वजह से नहीं हो सका। जिसके चलते शव को सुरक्षित रखने को बर्फ की सिल्लियां मंगवा दी हैं।
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