फतेहपुर। बाक्सिंग की दुनिया की सेलेब्रिटी बन चुकीं मैरी काम की तरह अपना करियर बॉक्सिंग की दुनिया में ही बनाने का ख्वाब लिए मानसी त्रिवेेदी की जंग जारी है। अभावों के बीच अभ्यास में अडिग मानसी के सपनों को मुक्केबाज निकहत जरीन की जीत ने पंख लगा दिए हैं। मजबूत इरादों से मानसी अपनी मुक्केबाजी के हुनर को और भी प्रभावी बनाने में लगी हुई हैं।
खुशवक्तराय नगर के सत्येंद्र त्रिवेदी एक पेट्रोल पंप में काम करते हैं। इससे पहले वह तकरीबन डेढ़ दशक से महाराष्ट्र के पूणे में परिवार के साथ रह रहे थे। वहीं जन्मी मानसी को मुक्केबाजी का जुनून चढ़ा और उन्होंने स्थानीय क्लब में अभ्यास शुरू कर दिया। छोटी सी उम्र में बड़े इरादे लेकर मुक्केबाजी की रिंग में उतरी मानसी ने पहले जिला और फिर प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लिया। महाराष्ट्र के थाणे में हुई स्टेट स्तर की प्रतियोगिता में मानसी को ब्रांज मेडल मिला।
वक्त बदला और मानसी अपने माता-पिता और छोटी बहन के साथ फतेहपुर में आकर रहने लगी। यहां कोई क्लब या कोच न मिलने से प्रैक्टिस में बाधा आने लगी। वह नहर कालोनी में श्रवण कुमार गुप्ता से मुक्केबाजी सीखती है। शुक्रवार निकहत जरीन के मुक्केबाजी में गोल्ड लाने की खबर सुनकर एक बार फिर से उम्मीद जगी है। वह अभी बारहवीं की छात्रा है। पढ़ाई के साथ मुक्केबाजी में भी अभ्यास कर रही हैं।