फतेहपुर। सीएमओ कार्यालय की आख्या के आधार पर धोखाधड़ी की दिव्यांगजन अधिकारी की ओर से कराई गई प्राथमिकी के बाद शुक्रवार को महाठग को जेल भेजने के लिए पूरे दिन जद्दोजेहद होती रही। शाम तक उसे कोर्ट में पेश नहीं किया जा सका।
कोर्ट में पेशी से पहले सीएमओ कार्यालय ने उनके ही जारी दस्तावेजों पर सत्यापन की मुहर नहीं लगाई। कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारियों के बैकफुट पर आने के बाद विवेचक ने भी हाथ खड़े कर दिए। इस पर एसपी ने विवेचक सत्यदेव गौतम को लाइन हाजिर कर दिया। हालांकि एसपी अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि उन्हें पूर्व के मामले में लाइन भेजा गया है।
सीएमओ कार्यालय से थरियांव के रामपुर निवासी अर्जुन सिंह, उनकी पत्नी सुनीता और महाठग पुत्र सुमित सिंह को दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी किए गए थे। इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर दिव्यांगजन अधिकारी की ओर से कोतवाली में बुधवार को प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इसके बाद सुमित सिंह को बृहस्पतिवार शाम पुलिस ने गिरफ्तार किया। महाठग पर पहले से भी ठगी के कई मुकदमे दर्ज हैं।
विवेचक शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय में दस्तावेजों का सत्यापन कराने पहुंचे। इस दौरान दिव्यांग कल्याण बोर्ड के नोडल अधिकारी एसीएमओ डाॅ. सुरेश कुमार कुछ देर बातचीत के बाद निकल गए। कार्यालय के बाबू दो दिन के अवकाश पर चले गए।
विवेचक ने प्रभारी सीएमओ से संपर्क किया, लेकिन वह भी कागजों का सत्यापन कराने के बजाय कार्यालय से चले गए। इससे पुलिस के सामने साक्ष्य जुटाने का संकट खड़ा हो गया। दरअसल, तीनों के प्रमाण पत्रों में विभागीय स्तर पर खेल किए जाने की बू आ रही है।
आरोपी सुमित का दिव्यांग प्रमाणपत्र डाॅ. मनीष चौरसिया ने जारी किया था। इसमें सुमित को 60 प्रतिशत पैर से दिव्यांग बताया गया। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक कार्यालय में पंजीकरण 10 जनवरी 2020 को दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाया गया। वहीं रजिस्टर में पंजीकरण रामकिशोर के नाम पर दिव्यांग होना दर्ज है।
अब सवाल है कि पेंशन के लिए भी विभाग ने बिना परीक्षण कैसे संस्तुति कर दी। सुमित के साथ जारी उसकी मां और पिता के प्रमाण पत्रों में भी खेल किए जाने की बात सामने आई है।
प्रमाणपत्रों को जाली सिद्ध करना पुलिस के सामने चुनौती बना है। इसी वजह से कार्यालय के अधिकारी कागजों का सत्यापन करने से पीछे हटते नजर आए और विवेचक भी साक्ष्य जुटाने में असहज दिखे।
सुमित को जेल भेजने के लिए पर्याप्त साक्ष्य न होने की जानकारी पर कोतवाली पुलिस में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने पूरी ताकत झोंक दी। सीओ सिटी गौरव शर्मा को लगाया गया। खबर है कि किसी तरह सीओ सिटी ने देर शाम दस्तावेजों का सत्यापन कराया।
एसपी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ साक्ष्यों की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। उसे जल्द कोर्ट में पेश किया जाएगा। प्रभारी सीएमओ डाॅ. पीके सिंह ने बताया कि फर्जी विकलांग प्रमाणपत्र कार्यालय से नहीं बने हैं। आरोप गलत लगाए जा रहे हैं।
थाने की टॉप-10 सूची में सुमित दर्ज
महाठग के खिलाफ अंदरखाने पुलिस बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। उसका नाम थरियांव थाने के कुख्यात अपराधियों की सूची में डाला गया है। उसे थाने की टॉप-10 अपराधियों की सूची में शामिल किया गया है। खबर है कि पूर्व में पीडब्ल्यूडी ने सुमित के घर के निर्माण का कुछ हिस्सा अवैध घोषित किया है। उस पर जल्द बुलडोजर की कार्रवाई हो सकती है। साथ ही गैंगस्टर भी लग सकता है।
पिता ओबीसी और बेटा सामान्य
दिव्यांगजन अधिकारी की 2023 की सूची में सुमित सिंह के पिता अर्जुन सिंह की जाति पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में दर्ज है। वहीं सुमित सिंह के नाम के आगे जाति सामान्य लिखी है। सुमित सिंह ने सरकारी लाभ पाने के लिए हर जगह खेल किया है।
फोटो-50-सुमित सिंह। स्रोत: सोशल मीडिया