डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने शुक्रवार को वर्ल्ड फार्मासिस्ट डे मनाया। इस मौके पर फार्मासिस्टों को स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ बताया गया। कहा गया बगैर फार्मासिस्ट के बेहतर स्वास्थ्य की कल्पना संभव नहीं है। हकीकत यही है औषधि से अगर रोगियों को जीवन मिलता है, तो औषधियों का जीवनदाता फार्मासिस्ट है।
शुक्रवार को अचल प्रशिक्षण केंद्र में एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद्र सिंह की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित किया गया। बतौर मुख्य अतिथि सीएमओ डॉ. विनय कुमार पांडेय ने फार्मासिस्टों की उपयोगिता पर रोशनी डालते हुए उन्हें स्वास्थ्य विभाग की सबसे अहम कड़ी बताया।
कहा जनता की सेहत की देखरेख में फार्मासिस्टों को बड़ी भूमिका है। एसीएमओ डॉ. एलआर सचान ने कहा औषधि की खोज इंडस्ट्री में मैन्यूफैक्चरिंग, संवाहन, संवर्धन से लेकर रोगियों के बीच की श्रंखला का नाम ही फार्मासिस्ट है।
औषधि रोगियों को जीवन देती है, किंतु फार्मासिस्ट औषधियों को जीवन देता है। इसमें बी फार्मा, फार्मा डी, एम फार्मा, पीएचडी तक के फार्मासिस्ट काम करते हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष चंद्र सिंह ने कहा जनता को चाहिए वह क्वालीफाइड फार्मासिस्टों सेही औषधियां प्राप्त करें, जिससे गुणवत्तायुक्त औषधियां ही उन्हें मिल सकें।
फार्मासिस्टों के अलावा और किसी से दवाएं न ली जाएं। यदि फार्मासिस्ट के अलावा अन्य कोई दवाएं देता है तो उसे एक हजार रुपये जुर्माना या फिर छह महीने की कैद अथवा दोनों दंड देने का प्रावधान है। कार्यक्रम में सीएमएस डॉ. एके मिश्र, डॉ. श्रीराम उमराव, डॉ. एमएस हाशमी और डॉ. एचके विश्वकर्मा मुख्य रूप से मौजूद रहे।