फतेहपुर महोत्सव की रविवार की शाम सूफियाना महफिल के नाम रही। ‘क्यों आ के रो रहा है, मोहम्मद के शहर में’ जैसी हर जुबान पर रहने वाली कव्वाली गाने वाले असलम साबरी ने अपनी विधा और मनोज मिश्रा के सूफी नृत्य ने पांडाल में नूरानी माहौल बांधा। दर्शकों की गड़गड़ाहट ने दोनों कलाकारों का इस्तकबाल किया।
मशहूर कव्वाल असलम साबरी ने हारमोनियम संभाला तो साथी कलाकारों ने वाद्य यंत्रों से महोत्सव में चार चांद लगा दिए। असलम साबरी ने कलाम पढ़े तो माहौल में चार चांद लग गए।
‘मन से मन को तौलिये कबहो न दो मन हों’ के जरिये लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बीच बीच में शेर पढ़े, ‘पीना हराम है न पिलाना हराम है, पीने के बाद होश में आना हराम है’ के माध्यम से वाहवाही लूटी।
‘छाप तिलक सब छीनी मोहसे नैना मिलाइ के’ गाकर श्रोताओं को रोमांचित कर दिया। इन्हीं कलाम पर सूफी नृत्य पेश कर रहे मनोज मिश्रा आकर्षण का केंद्र रहे। वह धुन में ही सूफियाना धुन में रमे रहे, जिनके चेहरे की मंत्रमुग्ध करने वाली मुस्कान हरेक निहार रहा था।