खागा। कोरोना संक्रमण का न तो खौफ दिखा और न ही मंदी का गम। सरकार के आदेश पर जैसे ही शराब की दुकानों का शटर उठा तो शौकीनों ने दिल खोलकर शराब खरीदी और उसे गटक गए। करीब 12 दिन बाद शराब की दुकानें खुलीं तो जनपद में एक ही दिन में एक करोड़ 15 लाख रुपये की शराब बिक गई।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मद्देनजर जनपद में 26 अप्रैल को मतदान हुआ और दो मई को मतगणना। इस दौरान एक मई के बाद से दुकानें बंद कर दी गईं। तीन मई तक मतगणना हुई और चार मई से लॉकडाउन शुरू हो गया। ऐसे में दुकानों के शटर एक मई के बाद से नहीं खुले।
शराब के शौकीनों के लिए लॉकडाउन बेहद ही बेचैनी वाला था। शराब नहीं मिलने के कारण शौकीनों को महंगे रेट पर चोरी-छिपे शराब खरीदनी पड़ रही थी। 12 मई को सरकार के आदेश पर जैसे ही शराब की दुकानें खुलीं तो लोग टूट पड़े।
आबकारी विभाग से प्राप्त आंकड़ों पर गौर करें तो केवल 12 मई को एक करोड़ 15 लाख रुपये के करीब ब्रिकी हुई। यह बिक्री आम दिनों की बिक्री से 10 लाख रुपये अधिक है। जनपद में रोजाना औसत बिक्री एक करोड़ पांच लाख रुपये के आसपास है।
बिंदकी सर्किल की बिक्री ने मारी हाफ सेंचुरी
बिंदकी तहसील क्षेत्र बिक्री के मामले में अव्वल रहा। बुधवार को जब दुकानें खुलीं तो यहां करीब 50 लाख रुपये के आसपास बिक्री दर्ज की गई है। जबकि फतेहपुर सदर क्षेत्र में 45 और खागा सर्किल में 20 लाख रुपये के आसपास कारोबार हुआ।
जनपद में आबकारी दुकानों की स्थिति
फतेहपुर में मौजूदा समय देशी शराब की 312, अंग्रेजी शराब की 79 और बीयर की 68 दुकानें हैं। इनके अलावा फतेहपुर में एक मॉडल शॉप है। फतेहपुर में आम दिनों में विभाग को करीब 90 से 95 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। मगर सोमवार को राजस्व एक करोड़ के नजदीक पहुंच गया।
शराब ठेके खुलने से पुलिस विभाग को राहत
जनपद में पिछले महीने जहरीली शराब के चलते दो मौतें हो गई थीं। इसके कारण प्रशासनिक गलियारों में धमाचौकड़ी मच गई थी। अफसरों को कार्यवाही भी झेलनी पड़ी। एक बार फिर से आबकारी की दुकानों का शटर गिरने से पुलिस महकमा बेहद दबाव में था। इसके पीछे कारण है कि शौकीन शराब पीने के लिए यहां-वहां से जो भी मिलता है उसे खरीदते हैं और यहीं पर नकली शराब की खपत बढ़ती है और विषाक्त कांड जैसी घटनाएं होती हैं। शटर खुलने से पुलिस विभाग को एक राहत यह जरूर मिली है कि अब शौकीन सीधे दुकानों से शराब खरीदेंगे।