फतेहपुर दहेज की लालच में अपने घर की बहू को जलाकर मार देने के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट की अपर जिला जज अर्पणा त्रिपाठी ने सभी मुल्जिमों पति, सास-ससुर, जेठ-जेठानी और नंद-नंदोई को कारावास की सजा सुना दी। अदालत का आदेश आते ही मामले के सभी सातों आरोपियों को जेल भेज दिया गया। हालांकि अदालत ने इसी प्रकरण में आरोपी रहे मृतका के दो चाचा ससुर को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है।
घटना कानपुर देहात के मंगतपुर थानाक्षेत्र के अकना गांव में 20 फरवरी 2016 को घटित हुई थी। गाजीपुर थानाक्षेत्र के फुलवामऊ गांव निवासी उदय प्रताप सिंह ने अपनी पुत्री ऊषा देवी की शादी 9 जुलाई 2014 को ललौली थानाक्षेत्र के कोर्रा गांव निवासी राकेश पुत्र जगतपाल से की थी। शादी के बाद से ही पति राकेश और उसके घरवाले ऊषा पर मायके पक्ष से एक लाख रुपये और एक मोटरसाइकिल दिलाने की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर आए दिन उसे प्रताड़ित करते थे।
शादी के एक साल बाद गृह कलह के कारण ऊषा को उसकी नंद संता देवी और नंदोई कृष्ण कुमार उर्फ गुड्डू अपने गांव अकना थाना मंगतपुर जिला कानपुर देहात ले गए थे। जहां ऊषा की 20 फरवरी 2016 को संदेहास्पद स्थितियों में आग से जलने के कारण मौत हो गई थी। बेटी की मौत के बाद पिता उदय प्रताप सिंह के बार-बार तहरीर देने पर भी जब पुलिस ने मुकदमा नहीं लिखा तो उन्होंने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत का दरवाजा खटखटाया।
सीजेएम कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने इस मामले में दहेज हत्या की एफआईआर लिखी थी। पुलिस की चार्जशीट में मृतका ऊषा देवी के पति राकेश, सास मुन्नी देवी, ससुर जगतपाल, जेठ बृजेश और सुरेश, जेठानी प्रतिमा सिंह, चाचा ससुर मुन्नू सिंह और राम सिंह, नंद संता देवी और नंदोई कृष्ण कुमार उर्फ गुड्डू का बतौर अभियुक्त नाम आया।
घटना के बाद से पति राकेश जेल में था। जबकि अन्य सभी लोग जमानत पर थे। बुधवार को मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट 2 की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अर्पणा त्रिपाठी ने की। उनके समक्ष सहायक शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र उत्तम ने साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए।
जिन पर विचार करते हुए एडीजे अर्पणा त्रिपाठी ने पति राकेश, नंद संता देवी और नंदोई कृष्ण कुमार उर्फ गुड्डू को दस-दस साल और 12-12 हजार रुपए जुर्माना और सास मुन्नी देवी, ससुर जगतपाल, जेठ बृजेश, सुरेश और जेठानी प्रतिमा सिंह को सात-सात वर्ष और 8-8 हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई है। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में मृतका की चाचा ससुर मुन्नू सिंह और राम सिंह को इस मामले से बरी कर दिया।