शहर के विद्यार्थी चौराहा स्थित आईडीबीआई बैंक में कैश खत्म होने की नोटिस।
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पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट बंद होने के बाद बैंकों में कैश का संकट बरकरार है। शहर के बैंकों में सुबह तो थोड़ी भीड़ रही लेकिन दोपहर तक कैश खत्म होते ही भीड़ भी छंट गई। अलबत्ता एसबीआई मेन ब्रांच के पास लगे एटीएम में लंबी लाइन रही। वैसे भी शनिवार को बैंकों ने केवल सीनियर सिटीजन को सुविधा दी थी लेकिन हालात यह रहे कि उन्हें भी बिना कैश लिए लौटना पड़ा। कोई दादी, नानी को बाइक में बैठाकर बैंक पहुंचा तो किसी ने बाबा और दादा को सहारा देकर नोट बदलवाया। चर्चा यह भी रही कि कुछ लोगों ने इस काम में भी परिचित बुजुर्गों का उपयोग कर अपना काम निकाला। कई सीनियर सिटीजन ने कैश जमा किया और रुपये भी बदले। पेश है एक रिपोर्ट --
दृश्य एक:- समय दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर शहर के विद्यार्थी चौराहा स्थित आईडीबीआई बैंक में कैश खत्म होने की नोटिस चस्पा थी। यहां रोज लगने वाली न तो लंबी लाइन नजर आई और न ही सहायता कैंप लगाए लोग। बैंक के लोग अपने काम निपटाने में लगे दिखे। सहायक शाखा प्रबंधक अक्षत रस्तोगी ने बताया कि दोपहर तक कैश बांटा गया इसके बाद खत्म हो गया। सोमवार को कैश मिलने की उम्मीद है।
दृश्य दो:- समय दोपहर एक बजकर 10 मिनट। सिविल लाइन स्थित भारतीय स्टेट बैंक की कृषि शाखा। बाहर सन्नाटा। कुछ सीनियर सिटीजन खड़े और कुछ बैठे थे। रकम दी गई और अदला-बदली भी हुई। सुबह से ही लोग यहां पहुंच गए थे लेकिन जब मालूम चला कि सिर्फ सीनियर सिटीजन को लाभ मिलेगा तो लोग लौट गए। शाखा प्रबंधक सुधीर कुमार ने बताया कि कैश कम मिलने से दिक्कत है।
फतेहपुर। दोपहर में लगभग एक बजे। बैंक कर्मी पत्थरकटा चौराहा के स्टेट बैंक के एटीएम में कैश डाल रहे थे। यहां बैंक में भीड़ कम थी लेकिन एटीएम के इंतजार करने वाले काफी थे। कैश पड़ने के दौरान ही लोग अपनों को फोन करके बुलाने लगे कि जल्दी कार्ड लेकर आ जाओ एटीएम में कैश आ गया। एक ओर एटीएम में कैश डाला जा रहा था दूसरी ओर देखते ही देखते पंद्रह मिनट के अंदर दो किमी लंबी लाइन लग गई।
फतेहपुर। पांच सौ और एक हजार रुपये बंद होने से व्यापार जगत बदहाल है। शहर के चौक बाजार ठठराही में बर्तन की दुकानों में इक्का-दुक्का ग्राहक ही नजर आ रहे हैं। कैश की किल्लत होने से लोग खरीदारी नहीं कर रहे हैं। जो ग्राहक आ रहे हैं, वे पांच और हजार रुपये के नोट दे रहे हैं जिससे उपभोक्ताओं को लौटाना पड़ता है। बर्तन व्यापारी विशाल बताते हैं कि नोट बंद होने के बाद कस्टमर बहुत कम आ रहे हैं। आलम यह है कि किसी दिन तो बोहनी तक नहीं होती। बर्तन व्यापारी मोहन कहते हैं कि पहले प्रतिदिन डेढ़ हजार से चार हजार तक दुकानदारी हो जाती थी लेकिन नोट बंद होने के बाद सन्नाटा है। जो ग्राहक पांच सौ और हजार रुपये की नोट देते हैं तो मजबूरी में लौटाना पड़ता है।
फतेहपुर। शहर के इकलौते थियेटर सदाशिव पैलेस में इन दिनों ग्राहकों का टोटा है। काउंटर से लेकर थियेटर के अंदर तक सन्नाटा रहता है जिससे प्रतिदिन हजारों रुपये का नुकसान हो रहा है। चार दिन तो शो बंद रहे। शनिवार को पहला शो चलाया गया। हालांकि उसमें भी महज 20-25 दर्शक थे। प्रबंधक अनूप कुमार द्विवेदी का कहना है कि शनिवार को जब कुछ ग्राहक आए तो शो चालू कराया है। इस बार तीसरी मूवी घाटे पर गई है। इन दिनों कम दर्शक आ रहे हैं। सब तो नोट के जुगाड़ में हैं। इसके पहले 70 से 120 दर्शक आते थे। इंटरटेनमेंट टैक्स के रूप में पांच सौ और एक हजार रुपये की नोट नहीं ले रहे हैं। यही हालात खागा और बिंदकी के थियेटरों की भी है।