फोटो-37-सड़क खराब होने से दलदल से शव लेकर जाते ग्रामीण। स्रोत: वीडियो ग्रैब
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असोथर। सरकंडी गांव के मजरे नंदन बाबा का डेरा में आजादी के दशकों बाद भी पक्का रास्ता नहीं बन सका है। बारिश होते ही कच्चा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है। मंगलवार रात रामदेव निषाद (60) की मौत के बाद परिजन शव को चारपाई पर रखकर कीचड़ भरे रास्ते से ले जाने को मजबूर हुए। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है।
ग्रामीणों का कहना है कि डेरे में करीब 10 से 12 परिवार रहते हैं। मुख्य मार्ग से डेरा तक महज 800 मीटर का रास्ता है लेकिन बारिश में कीचड़ की समस्या हो जाती है। हालत यह है कि एंबुलेंस और चार पहिया वाहन तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
ऐसे में बीमार लोगों और बुजुर्गों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते को लेकर पहले भी कई बार अधिकारियों और प्रधान के सामने समस्या रखी जा चुकी है। तत्कालीन खंड विकास अधिकारी राहुल मिश्रा और प्रधान के समक्ष ग्रामीणों ने रास्ते में खड़ंजा लगवाने के लिए सहमति पत्र भी दिया था। इसके बावजूद रास्ते का निर्माण नहीं हो सका।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि रास्ते की समस्या का स्थायी समाधान कराया जाए ताकि बारिश के दिनों में किसी बीमार या मृतक को इस तरह चारपाई पर उठाकर कीचड़ भरे रास्ते से न ले जाना पड़े।
प्रधान पुष्पा देवी ने बताया कि रास्ता निजी भूमि से होकर गुजरता है। इसके कारण भूमि स्वामियों की सहमति नहीं बन पा रही है। चकबंदी के बाद रास्ते का निर्माण कराने का प्रयास किया जाएगा।
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