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Fatehpur News: नदियां उफनीं, कटरी डूबी... नावों पर ठहरा जीवन

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फोटो-24-औंग क्षेत्र के गंगा कटरी क्षेत्र का डूबा संपर्क मार्ग। संवाद
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औंग/चौडगरा। गंगा और पांडु नदी के उफनाने से देवमई और मलवां ब्लॉक का गंगा कटरी क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ गया है। बृहस्पतिवार को गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 100.86 मीटर को पार कर 101.08 मीटर पर बह रहा है। 24 घंटे में जलस्तर 0.22 सेंटीमीटर बढ़ने से कटरी के कई गांवों में पानी घुस गया।
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संपर्क मार्ग डूबने से आवागमन ठप हो गया है। घरों में पानी पहुंचने के बाद ग्रामीण निजी नावों से परिवार और जरूरी सामान लेकर ऊंचाई वाले स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ की स्थिति गंभीर होने के बावजूद राहत और बचाव की पर्याप्त व्यवस्था जमीन पर दिखाई नहीं दे रही है।

इन गांवों में बढ़ी मुश्किल
मलवां ब्लॉक की अभयपुर ग्राम पंचायत के मदारपुर, बिंदकी फार्म, नया खेड़ा, सदनहा, पंचघरा, बड़ा खेड़ा, मल्लूखेड़ा, जाड़े का पुरवा और औसेरी खेड़ा प्रभावित हैं। वहीं देवमई ब्लॉक की गलाथा ग्राम सभा के बेरीनारी, रामघाट, बेनीखेड़ा और शिवराजपुर के मिश्रण खेड़ा, लालखेड़ा, दमोतीखेड़ा, बसंतखेड़ा, भाऊपुर व पुरानी कटरी की बस्तियां बाढ़ के पानी से घिर गई हैं। कई गांवों का मुख्य संपर्क मार्ग डूब गया है।
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कालीकुंडी गांव में पानी घरों तक पहुंच गया है। ग्रामीण घर छोड़ने को मजबूर हैं। बड़ाखेड़ा निवासी श्रीपाल ने बताया कि गांव के कई घरों में पानी पहुंच गया है। कालीकुंडी निवासी संतराम ने बताया कि वह परिवार के साथ दैनिक इस्तेमाल का जरूरी सामान नाव से निकालकर गांव से बाहर आ गए हैं। सामान रिक्शे से महुआ घाटी ले जा रहे हैं। उनका आरोप है कि वहां बनाए जा रहे शिविर में अभी कोई देखने वाला नहीं है।

नाव से निकाल रहे घर का सामान
बाढ़ बढ़ने के साथ कालीकुंडी समेत कई गांवों के परिवार निजी नावों का सहारा ले रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से अभी तक पर्याप्त नाव और राहत सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई है। लोग अपनी व्यवस्था से घरों से निकल रहे हैं। ग्रामीणों ने राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, बिजली, शौचालय, दवा और अन्य जरूरी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की है।
प्रशासन ने महुआ घाटी में बाढ़ प्रभावित लोगों के ठहरने के लिए अस्थायी शिविर बनाने का दावा किया है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि शिविर में अभी रहने और खाने-पीने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में यदि बाढ़ प्रभावित परिवार वहां पहुंचते हैं तो उनके सामने रहने और भोजन की समस्या खड़ी हो सकती है।

फसलें भी डूबीं, किसानों की बढ़ी चिंता
जाड़े का पुरवा के किसान राम आसरे निषाद, अमर बहादुर और बैजनाथ ने बताया कि खेतों में पानी भरने से धान की फसल के साथ लोबिया, भिंडी, परवल, मिर्च, करेला और कुंदरू की फसलें भी डूब गई हैं। किसानों को फसल बर्बाद होने से आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है।

मौके पर लेखपाल, अधिकारी नहीं पहुंचे
प्रभावित क्षेत्रों में लेखपाल कुलदीप उत्तम, कमल सिंह और सेक्रेटरी मोहम्मद असलम के मौजूद रहने की जानकारी है। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी और आपदा राहत टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा नहीं ले रही है। बाढ़ पीड़ित राजेंद्र, राकेश, चंद्रपाल, भूरे, तिलक, राजाराम, भोला, रामशंकर और अनूप निषाद ने बताया कि गांवों में पानी लगातार बढ़ रहा है, लेकिन राहत शिविर में अभी तक जरूरी सुविधाएं नहीं हैं।

दो जिलों की सीमा में फंसे किसान
शिवराजपुर ग्राम सभा के किसान वीरेंद्र यादव ने बताया कि उनके खेत उन्नाव जिले की सीमा में हैं, जबकि निवास फतेहपुर जिले में है। इस वजह से उन्हें आपदा प्रबंधन विभाग की राहत और सहायता का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी तरह कई अन्य किसान भी दो जिलों की सीमा के बीच फंसे हैं। बाढ़ के समय यह स्थिति किसानों की मुश्किल और बढ़ा रही है।

भिटौरा घाट पर लगे मापक यंत्र के अनुसार गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 100.86 मीटर से ऊपर बह रहा है। अभयपुर के मदारपुर पंचायत भवन और आशापुर में 100-100 लोगों के ठहरने की व्यवस्था की जा रही है। शुक्रवार से दोनों स्थानों पर अस्थायी केंद्र शुरू हो जाएंगे। बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
- कृष्ण कुमार, बाढ़ प्रबंधन अधिकारी।

फोटो-24-औंग क्षेत्र के गंगा कटरी क्षेत्र का डूबा संपर्क मार्ग। संवाद

फोटो-24-औंग क्षेत्र के गंगा कटरी क्षेत्र का डूबा संपर्क मार्ग। संवाद

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