जिले में सौ साल की उम्र के इकलौते स्वतंत्रता
संग्राम सेनानी ईश्वरचंद सिंह को गांधीजी की काफी बातें अभी तक याद है।
शनिवार को जब महात्मा की पुण्यतिथि पर उनसे चर्चा हुई तो उनकी आंखों में
आंसू छलक आए। बोले, महात्मा गांधी की हत्या होने की खबर अगले दिन लग पाई
थी। यकीन ही नहीं हो रहा था कि गांधीजी अब उनके बीच नहीं हैं। उन्हें तो
ऐसा लगा कि जैसे परिवार का ही कोई करीबी दूर चला गया।
स्वतंत्रता
संग्राम सेनानी ईश्वर चंद ने बताया कि उस समय फतेहपुर में जिसने भी सुना,
विश्वास नहीं कर पा रहा था। सभी में बहुत गुस्सा था, हो रहा था कि सामने
मिल जाए तो उसे भी मार डालें।
बाद में पता चला कि गांधीजी ने निधन होने से
पहले कहा था कि मेरी हत्या के बाद कहीं भी किसी भी प्रकार का उपद्रव,
आंदोलन या बवाल न किया जाए। हत्यारे को सजा भी न दी जाए।
इन वचनों की वजह
से सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व जनता ने चुपचाप शोक मनाया। स्वतंत्रता
संग्राम सेनानी का कहना है कि पुण्यतिथि व जयंती हर साल मनाई जाती है लेकिन
उनके सिद्धांतों को कोई नहीं मान रहा। अहिंसा के पुजारी के देश में हर तरफ
हिंसा है।