नई मस्जिद आबूनगर का निरीक्षण करने पहुंची ईओ रश्मि भारती।
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रमजान के आखिरी जुमा की नमाज शुक्रवार को अकीदत और एहतराम से पढ़ी जाएगी। अलविदा की नमाज में अल्लाह की बरसने वाली खास मेहरबानी को हासिल करने के लिए मस्जिदों में रोजेदारों का सैलाब उमड़ेगा। नमाजियों की भीड़ के मद्देनजर गुरुवार शाम तक इबादत के इंतजाम होते रहे। कई मस्जिदों में भीड़ के दोगुनी और तिगुनी होने के पिछले साल के आंकड़े के चलते तंबू कनात की व्यवस्था की गई है। उधर, नगर पालिका ने साफ- सफाई व पानी व्यवस्था को लेकर कमर कस ली है।
अलविदा की नमाज में साफ सफाई की समुचित व्यवस्था समेत नमाजियों को पानी की शुद्ध आपूर्ति को नगर पालिका ने उपाय किए। ईओ रश्मि भारती ने आबूनगर की नई बस्ती स्थित मस्जिद पहुंचकर व्यवस्था का जायजा लिया। ईद की नमाज को लेकर ईदगाह मैदान में सड़क की पैचिंग का काम चालू हो गया है।
खास इनाम देती अलविदा की नमाज- कादरी- फतेहपुर। यूं तो जुमा की अहमियत हर जमाने में हर नबी के लिए किसी न किसी वारदात से जुड़ा दिन होता है। जुमा को दिनों का सरदार कहा जाता है। इस दिन अल्लाह ताला अपने बंदों की दुआ की कुबूलियत आम दिनों से कहीं अधिक फरमाता है।
काजी-ए-शहर कारी फरीदउद्दीन कादरी ने बताया कि सदकए फित्र अल्लाह व उसके रसूल की मंशा है। इर्द जैसे त्यौहार की खुशी अमीर और गरीब सभी को एक जैसा मनाना चाहिए। इसके लिए अमीरों पर ये वाजिब कर दिया गया है कि नमाजे ईदुल फित्र अदा करने से पहले हर मालिके नेसाब अपनी और अपने घर के एक-एक फर्द की ओर से सदकए फित्र अदा करे।
इस सदकए फित्र को मिकसीन, मोहताज, असहाय, गरीब, यतीम, मजलूम व मुसाफिर तक पहुंचाया जाए। खुलासा किया सदकए फित्र दो किलो 45 ग्राम का होता है। सदकए फित्र अदा न करने वाले के रोजे व नमाज जमीन और आसमान के बीच मोअल्लक रहते हैं। अल्लाह उन्हें कुबूल नहीं करता है।