असली और नकली के फेर में 10 का सिक्का फंस गया है। बाजार में भ्रम की स्थिति पैदा होने से यह दर-दर ठुकराया जा रहा है। छोटे और बड़े दुकानदारों में इस सिक्के को लेकर असमंजस है।
एक पखवारे से 10 का सिक्का बाजार में बहस का मुद्दा बना हुआ है। दुकानदार और ग्राहक के बीच झिकझिक हो रही है। जितने मुंह उतनी बातें हो रही हैं। कोई रिजर्व बैंक आफ इंडिया का हवाला देकर इसका चलन बंद होने की बात कर रहा है तो कोई नकली 10 के सिक्कों की बाजार में बड़ी खेप होने की बात कह कर इस मुद्दे को हवा दे रहा है। ऐसे में असली सिक्का का चलन खतरे में पड़ता जा रहा है।
हर कोई पास में मौजूद इस सिक्के को जेब से जल्द से जल्द खपाना चाहता है। यही वजह है कि तमाम लोग इस सिक्के के एवज में आठ से पांच रुपये के एवज में खपाने को तैयार है। मंगलवार की सुबह शादीपुर चौराहा स्थित मामा चाय वाले की दुकान पर एक ग्राहक ने इस सिक्के को लेने से इनकार कर दिया। ग्राहक का कहना था कि यह सिक्का बंद हो चुका है।
चाय की चुस्की ले रहे अन्य लोगों ने जब ऐसा न होने की बात कही तब जाकर इस ग्राहक ने सिक्का लिया। नासिरपीर के आंचल ने बताया कि दुकानदार यह सिक्का नहीं ले रहे हैं। जनता के बीच भ्रम बना है। नहर कालोनी के पास जनरल स्टोर की दुकान चलाने वाले ऋषभ पटेल कहते हैं कि स्टाकिस्ट साफ तौर पर यह सिक्का लेने से मना कर रहे हैं। ग्राहक बंधे होने की वजह से उनसे यह सिक्का लेने से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे मेें दुकान में ऐसे सिक्कों का ढेर लगता जा रहा है।