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प्लेटफार्म के बजाय बाहर खड़ी गाड़ी पर रहता दिमाग

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रेलवे आरक्षण केंद्र के बाहर खड़े वाहन। संवाद - फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। रेलवे स्टेशन के बाहर वाहन पार्किंग की सुविधा नहीं है। जो लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। रेलवे ने यहां वाहन स्टैंड का ठेका किसी को नहीं दिया है। ऐसे में यहां वाहनों की चोरी का भय हमेशा बना रहता है।
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दिल्ली-हावड़ा रूट का फतेहपुर रेलवे स्टेशन प्रयागराज जंक्शन व कानपुर सेंट्रल के बीच में पड़ता है। कोरोना दौर से पहले यहां से रोजाना तीन हजार के आसपास यात्रियों का आना जाना होता रहा है।
इस वक्त भले ही साधारण यात्रा की सुविधा न होने से पर्याप्त भीड़ नहीं हो रही है, लेकिन वाहन स्टैंड की समस्या जस का तस कायम है।
यह सुविधा न होने से यात्रियों को छोड़ने और लेने आने वालों को अपने वाहन यहां वहां खड़े करने पड़ते हैं। वाहन स्टैंड न होने से सुरक्षा के नाते तमाम लोग कॉमन हॉल तक जाने से बचते हैं।
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दिल्ली जा रहे आबू नगर निवासी राशिद को छोड़ने आए अफजल ने दोस्त को बाइक पर चढ़े-चढ़े ही बेस्ट आफ लक बोल दिया।
रुकने पर खुद कह दिया कि बगैर वाहन स्टैंड के गाड़ी की खुद ही हिफाजत करनी है, तो इसी तरह दोस्ती से समझौता करना होगा।
रेलवे पुलिस की भी मुसीबत
वाहन स्टैंड न होने से रेलवे पुलिस को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। अंदर बाहर होने के दौरान रेलवे पुलिस के जवान, सड़क के दोनों तरफ खड़ी की गाड़ियों को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहते हैं। इसके बावजूद कई साइकिल व बाइक रेलवे स्टेशन के बाहर से गायब हो चुकीं हैं।
टेंडर लेने को कोई नहीं तैयार
रेलवे स्टेशन में दशक भर पहले तक वाहन स्टैंड की सुविधा थी। 12 साल पहले स्टैंड का संचालन करने वाले घुरू बताते हैं कि तब सारा दिन वाहन स्टैंड पर भीड़ बनी रहती थी।
डीआरएम दफ्तर से वाहन स्टैंड के दाम बढ़ने के कारण उन्होंने हाथ पीछे खींच लिए। रेलवे सूत्रों की माने तो टेंडर लगातार डाले जा रहे हैं, लेकिन उन पर फालो नहीं हो पा रहा है।
वाहन स्टैंड न होने से लोगों को परेशानी होना स्वाभाविक है। स्थानीय स्तर पर वाहन स्टैंड को लेकर कुछ नहीं किया जा सकता है। इस सुविधा को लेकर डीआरएम दफ्तर को पत्र लिखे गए हैं। - आरके सिंह, अधीक्षक, फतेहपुर रेलवे स्टेशन

पहले यहीं पर हुआ करता था वाहन स्टैंड। संवाद- फोटो : FATEHPUR

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