फतेहपुर। ठाकुर युगराज सिंह फार्मेसी कॉलेज की संबद्धता और संस्थान के लिए दर्शाई गई भूमि को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मामले में मुख्यमंत्री और जनसुनवाई अनुभाग के नोडल अधिकारी को शिकायती पत्र भेजकर स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच के साथ जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
शहर के आवास विकास निवासी अधिवक्ता संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि कॉलेज को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय लखनऊ से संबद्धता दिलाने में भूमि और संस्थान की मूलभूत सुविधाओं से जुड़े नियमों की अनदेखी की गई। उन्होंने फार्मेसी पाठ्यक्रम के संचालन के लिए जरूरी संसाधनों और व्यवस्थाओं की भी जांच कराने की मांग की है।
इस प्रकरण पर जब जिला पंचायत अध्यक्ष अभय प्रताप सिंह उर्फ पप्पू सिंह से उनका पक्ष जानना चाहा गया तो उन्होंने दो टूक कहा कि उन्हें प्रकरण की कोई जानकारी नहीं है।
भूमि हस्तांतरण को लेकर भी शिकायत
शिकायत में आरोप लगाया कि 18 अगस्त 2018 को निरंकारी गर्ल्स हाईस्कूल और एंग्लो संस्कृत कॉलेज से संबंधित भूमि में से करीब 0.3100 हेक्टेयर भूमि को अपने पक्ष में दान किए जाने की प्रक्रिया अपनाई गई। शिकायतकर्ता ने इसे नियम विरुद्ध बताते हुए जांच की मांग की है। पत्र के मुताबिक, 0.3640 हेक्टेयर भूमि में से 0.3100 हेक्टेयर के हस्तांतरण के लिए शिक्षा विभाग से अनुमति लिए जाने का उल्लेख है। शिकायत में आरोप है कि इसी भूमि के आधार पर फार्मेसी पाठ्यक्रम संचालन के लिए संबद्धता प्राप्त की गई।
नक्शे और राजस्व अभिलेखों में अंतर का आरोप
शिकायत में नक्शा संख्या 1117/2020 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इसमें गाटा संख्या 2526 में दूसरी इंस्टीट्यूशनल बिल्डिंग दर्शाई गई है। वहीं राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 2526 का क्षेत्रफल करीब 1.4570 हेक्टेयर बताया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि गाटा संख्या 2526 और 2543 एक-दूसरे से सटे नहीं हैं और दोनों की चौहद्दी भी अलग है। ऐसे में संस्थान की वास्तविक स्थिति, भूमि स्वामित्व, नक्शे और मौके पर मौजूद भवन का सत्यापन कराने की मांग की गई है।
जनसुनवाई के बाद भी जांच पूरी न होने का आरोप
शिकायत पत्र में कहा गया है कि प्रकरण को लेकर पहले जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की गई थी। शासन स्तर से संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए गए। 24 दिसंबर 2025 को शासन स्तर पर प्रकरण से संबंधित रिपोर्ट मांगी गई थी और इसी वर्ष 12 मार्च को जांच के लिए पत्र जारी किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद संस्थान की भूमि, भवन, नक्शे और संबंधित दस्तावेजों की मौके पर जांच पूरी नहीं हुई है।