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बर्ड फ्लू की दहशत से सहमें पोल्ट्री फार्म मालिक

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फर्सी गांव के पोल्ट्री फार्म में पसरा सन्नाटा - फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। बर्ड फ्लू की दहशत से पोल्ट्री फार्म मालिकों की परेशानी बढ़ गई है। अन्य जिलों को होने वाली सप्लाई बंद किए जाने से मुर्गे व अंडों की खपत कैसे होगी, इसकी चिंता उन्हें सताने लगी है। लोकल स्तर पर भी 50 प्रतिशत बिक्री कम हो गई है।
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जिले में 68 पोल्ट्री फार्म हैं। इनसे करीब डेढ़ से दो लाख रोज अंडे पैदा होते हैं और इनकी बिक्री पड़ोसी जिले रायबरेली, कानपुर में होती है। इसके साथ ही 20 से 30 क्विंटल चिकन भी बिक्री किया जाता है।
बर्ड फ्लू की वजह से पोल्ट्री फार्म से अंडा व मुर्गों की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। इससे पोल्ट्री फार्म के मालिकों की दिक्कतें बढ़ गई है। पोल्ट्री फार्म मालिकों का कहना है कि चूजों व मुर्गों को दाना, पानी का खर्च तो कम नहीं हुआ है।
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उनके लिए बाजार से दाना खरीद कर लाना पड़ता है। बर्ड फ्लू की दहशत से अन्य जिलों की सप्लाई तो बंद ही हुई है, लोकल स्तर पर भी बिक्री कम हो गई है। ऐसे में पोल्ट्री फार्म का खर्च कैसे निकलेगा, यह समझ नहीं आ रहा है।
पिछले साल कोरोना की शुरुआत में अफवाह फैली थी कि चिकन और अंडे खाने से कोरोना वायरस फैलता है। तब लोगों ने चिकन और अंडे खाने बंद किया थे। उस दौरान पोल्ट्री उद्योग को भारी नुकसान हुआ था।
कई पोल्ट्री फार्म वाले तो ढेर सारी मुर्गियां बहुत कम दाम और बेंच दी थी। नया-नया पोल्ट्री उद्योग शुरू करने वाले तो फार्म बंद ही कर दिए थे। तब अंडे का रेट थोक में दो से ढाई रुपये हो गया था।
कई महीने का संकट झेलने के बाद अब पोल्ट्री उद्योग पटरी पर आया था, लेकिन अचानक बर्ड फ्लू की दस्तक से इस उद्योग पर फिर से खतरा मंडराने लगा है।
बर्ड फ्लू का असर देखते हुए पोल्ट्री उद्योग वालों ने मुर्गे और मुर्गियों के वैक्सीनेशन का काम तेज कर दिया है। पोल्ट्री फार्म मालिक मुअज्जम ने बताया कि मुर्गियों का वैक्सीनेशन कराया जा रहा है।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके शर्मा ने बताया कि इस दौरान मीट खाने के शौकीन लोग जंगली पक्षियों का मांस न खाएं। जंगली पक्षियों से यह बीमारी फैली है।
पोल्ट्री उद्योग चलाने वाले तो नियमित मुर्गियों का वैक्सीनेशन करते हैं। सभी पोल्ट्री फार्म मालिकों से कहा गया है कि वह एहतियात बरतें। इसका कहीं भी लक्षण दिखे तो तुरंत सूचित करें।
इन विभागों को जिम्मेदारी
स्वास्थ्य विभाग : पीपीई किट, फेस मास्क और दवाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी।
विद्युत विभाग : प्रभावित क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी करने के निर्देश।
वन विभाग : क्षेत्र में आने वाले अप्रवासी पक्षियों व वाटर बाडीज पर निगरानी रखेंगे। पक्षियों के बीट को सैम्पल एवं मृत पक्षी गाइड लाइन के अनुसार उपलब्ध कराएंगे।
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लोक निर्माण विभाग : जरूरत पड़ने पर मार्गों का निर्माण, पंक्षियों के इकट्ठा मरने पर गड्ढा खोदने के लिए जेसीबी की व्यवस्था।
राजस्व विभाग : प्रभावित क्षेत्र का चिन्हीकरण, क्षेत्र में आवागमन पर प्रतिबंध एवं मुआवजा वितरण कराने की जिम्मेदारी।
पुलिस विभाग : प्रभावित क्षेत्र के आसपास कानून व्यवस्था सुनिश्चित करना, अवांछित वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध व अफवाहों पर नियंत्रण करना।
निकाय व पंचायत : जन बल उपलब्ध कराते हुए रैपिड रिस्पांस टीम की हर कार्रवाई में सहयोग करना।
सूचना एवं प्रसार मीडिया : क्षेत्र में अफवाहों पर प्रभावी नियंत्रण करेंगे। बिना केंद्र सरकार की पुष्टि के रोग संबंधी सूचना का प्रकाशन नहीं करेंगे।
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