जयराम नगर इलाके में छात्रा को अगवा कर बलि देने के मामले में अपनी नाकामी को छिपाते हुए खिसियाई पुलिस ने उल्टे आक्रोशित भीड़ पर शिकंजा कसा है। पुलिस ने मृतका के परिजनों समेत इलाके के बीस लोगों के खिलाफ नामजद और 20 अज्ञात लोगों पर रिपोर्ट दर्ज की है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद लोगों में दहशत का माहौल है। घरों से लोग इधर-उधर हो गए हैं। कोतवाल केके यादव की तहरीर पर लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ है।
पुलिस ने मृत छात्रा पलक के दादा राजबहादुर सिंह व मामा बृजेंद्र सिंह समेत इलाके के पुत्तन सिंह, बीनू सिंह, अजय पटेल, पप्पू सिंह चंदेल, बब्लू मिस्त्री, राममिलन भदौरिया, अजय भदौरिया, प्रहलाद गुप्ता, दिनेश सोनी, संजय सविता, प्रमोद सिंह, कुलदीप, राजू शास्त्री, अमित सिंह, सुंदर सिंह, धर्मेंद्र, सत्यम, क ल्लू भदौरिया के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस ने इनके खिलाफ बवाल की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। बताते चलें कि चार मार्च की शाम को छात्रा पलक (9) पुत्री बृजेश सिंह को अगवा कर लिया गया था।
इसके बाद बलि देकर पड़ोसी संदीप श्रीवास्तव और उसकी रिटायर्ड महिला दरोगा बहन आशारानी व पत्नी पिंकी ने लाश को छह मार्च की सुबह घर के पीछे फें क दिया था।
घटना से नाराज इलाके के लोगाें ने पुलिस के खिलाफ जमकर बवाल किया था। पुलिस के साथ मारपीट वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया था।
आरोपी के घर में भी आग लगाकर गृहस्थी तहस नहस कर दी गई थी। उधर, रिटायर्ड महिला दरोगा आशारानी ने जेल जाने के समय बताया कि उसके घर से उपद्रवियों ने सात लाख रुपये की संपत्ति लूट ली है। इसमें करीब पांच लाख रुपये के जेवर और 35 हजार रुपये की नकदी घर में रही है।
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इलाके के हर घर से एक आरोपी
पुलिस ने वीडियो फुटेज और इलाकाई लोगों से जानकारी जुटाने के बाद बलवे में आरोपियों को नामजद किया है। नामजद आरोपियों में करीब-करीब हर परिवार का एक सदस्य पुलिस की कार्रवाई की जद में आ चुका है। अब पुलिस आरोपियों पर शिकंजा कसने के लिए तैयारी बना रही है। इलाकाई लोगों के अनुसार कई नामजद आरोपी घटनाकांड के दौरान खुद को पुलिस की मदद में शामिल होने की बात कह रहे हैं। इस बड़ी कार्रवाई में कई दोषी पुलिस की पकड़ से दूर और कई निर्दोष भी फंसे हैं।
आरोपियों को पहुंचाया जेल
कोतवाली पुलिस आरोपियों के खिलाफ इलाके के लोगों में बवाल के बाद व्याप्त रोष से परिचित हो चुकी है। पुलिस ने मुख्य आरोपी संदीप श्रीवास्तव को लोगों की नजरों से बचाकर थरियांव थाने में छिपाकर रखा था। पुलिस ने गुपचुप तरीके से शनिवार की शाम मुख्य आरोपी और उसकी पत्नी पिंकी व रिटायर्ड दरोगा बहन आशारानी को कोर्ट ले गई थी। कोर्ट के आदेश पर पब्लिक की नजरों से बचाकर सीधे आरोपियों को जेल पहुंचा दिया है।
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दीवारों, कपड़ों में जमा खून बने पुख्ता सबूत
छात्रा पलक को अगवा करने के बाद बड़ी बेरहमी से मौत के घाट उतारा गया था। पुलिस की एक टीम ने आरोपी के घर से खून साफ करने वाले कपड़े बरामद किए हैं। मकान के अंदर उस जगह भी पुलिस पहुंची जहां पर छात्रा की हत्या की गई थी। आरोपियों ने छत पर चढ़ने वाले जीने के बगल में बने भंडारगृह में छात्रा को कूंचा था। उस जगह पर खून के छींटे मिले। हत्या के बाद कपड़ों से खून साफ किया था और उन कपड़ों की भी धुलाई की थी। सारे सबूत जुटाकर पुलिस ने फारेंसिक जांच के लिए भेजे हैं।
अपने गिरेबां में भी झांके पुलिस
पलक के लापता होने के बाद कप्तान के निर्देश पर स्थानीय पुलिस ने इलाके के कई घरों में छानबीन की। यहां तक कि पुलिस आरोपी के घर तक भी पहुंची। लेकिन आरोपी की रिटायर्ड दरोगा बहन की आवभगत में पुलिस बिना पूरे मकान की तलाशी लिए ही वहां से खिसक ली। लोगों में इस बात को जबरदस्त आक्रोश है कि पुलिस ड्यूटी के दौरान मुस्तैदी के साथ अपनी कार्रवाई करती तो मासूम को बचाया जा सकता था।