फतेहपुर। इलाके में हाल में सामने आई गोकशी की घटनाओं ने अपराधियों की बढ़ती सक्रियता को उजागर कर दिया है। आरोपियों तक न पहुंच पाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। बीते 10 दिनों में दो घटनाएं सामने आने के बावजूद पुलिस के गोवंश सुरक्षा के दावे कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि दोनों ही मामलों में गोवंशों के अवशेष पुलिस को हिंदू संगठनों की सूचना पर मिले। इससे मुखबिर तंत्र पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
हुसैनगंज थाना क्षेत्र के चितीसापुर गांव में पांच जनवरी को दो गोवंशों के अवशेष बरामद हुए थे। घटना के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया। बजरंग दल समेत अन्य हिंदू संगठनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन किया लेकिन चार दिन बीतने के बाद भी पुलिस किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है।
इससे पहले 28 दिसंबर को थरियांव थाना क्षेत्र के हसनापुर गांव के मजरे खोजे का पुरवा में एक कुएं से छह गोवंशों के अवशेष मिले थे। मौके पर पहुंचे बजरंग दल के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया था।
पुलिस ने दोनों मामलों में अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है लेकिन नौ दिन बीतने के बाद भी जांच में कोई बड़ी सफलता नहीं मिली। थरियांव थाना क्षेत्र के हसवा, करमचंदपुर सांडा, मोहम्मदपुर कला और एकारी जैसे गांव पहले से ही गोकशी को लेकर चर्चा में रहे हैं, फिर भी पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है।
कुछ जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। खुलासे के लिए तीन टीमें लगाई गई हैं। संदिग्धों की धरपकड़ कर पूछताछ की जा रही है। जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
- आलोक पांडेय, प्रभारी निरीक्षक।
गोवंश के मिले अवशेष मथुरा प्रयोगशाला जांच को भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद यह तय होगा कि वह कब के हैं। इसके आधार पर जांच शुरू की जाएगी। संदिग्धों की तलाश की जा रही है।
हरेकृष्णा, विवेचक।
गोकशी थरियांव और हुसैनगंज क्षेत्र में लंबे समय हो रही है। पुलिस रोक लगाने में नाकाम है। पुलिस कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूरी कर रही है। कई गांवों में रात के समय गोकशी की जा रही है। हिंदू संगठनों की सक्रियता पर ही धरपकड़ होती है।
राहुल अग्निहोत्री, जिला संयोजक बजरंग दल।