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पीएम आवास: मनरेगा मजदूरी अनियमितता का फटा बम

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पीएम आवास के लाभार्थी के खाते में भेजी गई रकम की रसीद। संवाद - फोटो : FATEHPUR
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मलवा। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में मनरेगा मजदूरी के नाम पर हुई अनियमितता का जैसे-जैसे खुलासा हो रहा है।
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वैसे-वैसे इस खेल से संबंधित खिलाड़ी बैकफुट में आ रहे हैं। इसकी बानगी मलवां ब्लाक के इब्राहिमपुर में देखने को मिली है।
यहां पीएम आवास बनने के बाद लाभार्थियों को उनके हिस्से की मनरेगा मजदूरी नहीं मिली थी। मगर इस खेल में फंसने का भय कहें या कुछ और कि दो साल पहले बने आवासों की मनरेगा मजदूरी अब लाभार्थियों के खातों में भेजना शुरू हो गई है।
उसमें भी 18540 की रकम के सापेक्ष महज दो से तीन हजार रुपये खातों में भेजकर छुटकारा पा लिया गया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में लाभार्थी को तीन चरण में भुगतान किया जाता है। पहली किश्त में 40 हजार रुपये, दूसरी में 70 व तीसरी में 10 हजार रुपये लाभार्थी को मिलता है।
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आवास बनने के बाद मनरेगा अंश 18540 लाभार्थी को दिया जाता है। मगर यह रकम लाभार्थियों को अब तक नहीं मिल सकी है।
आरोप है कि ब्लाक में तैनात एक बाबू ने पंचायत मित्र ने मजदूरी का पैसा हजम कर लिया है। मामले को लेकर इब्राहिमपुर गांव की दीपा, सरजू देवी, पूनम, प्रेमा देवी, अनीता, गीता देवी, सखिया, सावित्री, सुशील तिवारी, अनीता देवी ने जिलाधिकारी व डीसी मनरेगा को शिकायती पत्र देकर बताया कि वह सभी वर्ष 2016-2020 तक आवास योजना के लाभार्थी हैं।
मगर अभी तक उन्हें मनरेगा मजदूरी का पैसा नहीं मिला है। वहीं दूसरी तरफ पंचायत मित्र अपने बचाव में आवास के लाभार्थियों के खातों में नकद जमा की गई रकम की पर्चियां दिखाता धूम रहा है।
हालांकि इन पर्चियों की तारीखें बता रहीं हैं कि जो आवास दो साल पहले बनकर तैयार हो गए थे, उनमें अब दो दिन पहले धनराशि भेजी गई है। बैंक रसीदों में भरी हुई रकम महज 2736 रुपये है, जबकि मजदूरी 18540 रुपये है।
इस तरह से मजदूरी में किया गया खेल
आवास लाभार्थी को दी जाने वाली मजदूरी को उसके खाते में नहीं भेजा जाता, क्योंकि जॉबकार्ड में परिवार के कई लोगों का नाम भी अंकित होता है।
ऐसे में ब्लाक में बैठे संविदा कर्मी, कंप्यूटर आपरेटर इस खेल को बड़े आराम से अंजाम देते हैं। लाभार्थी के खाते की जगह किसी दूसरे व्यक्ति का खाता लगाकर उसे आगे मनरेगा विभाग को भेज देते हैं।
पैसा दूसरे के खाते में पहुंचते ही इस रकम को खाताधारक व संविदा कर्मी आपस में बांट लेते हैं। इस काम में बैंक कर्मियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े होते हैं, जो लाभार्थी के पहुंचने पर उन्हें यह कहकर वापस कर देते हैं कि रोजगार सेवक के जरिये ब्लाक में इसकी जांच करा लें।
रामपुर गांव की अनीता देवी ने बताया कि वर्ष 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास मिला था। जिसमें स्वयं मजदूरी की थी लेकिन अभी तक मजदूरी का भुगतान नहीं मिला है। हमें तो बताया भी नहीं गया कि इस काम के बदले में हमारे लिए पैसे भी आते हैं। पैसे कितने आए, कहां गए, हमें कोई जानकारी नहीं है।
इब्राहिमपुर की पूनम देवी ने बताया कि वर्ष 2017-18 में आवास मिला था। घर बनाने में उसने पति के साथ मिल कर काम किया था। इसके बाद भी पारिश्रमिक नहीं मिला है। रोजगार सेवक कहता है कि जितने दिन काम किया है, उतने दिन का पैसा खाते में भेज दिया है। मगर हमें एक फूटी कौड़ी नहीं मिली है।
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प्रकरण मेरे कार्यकाल का नहीं है। मैंने अभी हाल ही में मलवां ब्लाक का चार्ज संभाला है। यदि उच्चाधिकारियों से इस संबंध में कोई पड़ताल किए जाने के निर्देश मिलते हैं तो जांच करके दोषियों के विरुद्घ कार्रवाई की जाएगी। - अजय पांडेय, बीडीओ मलवां

लाभार्थी प्रेमा देवी का पीएम आवास। संवाद- फोटो : FATEHPUR

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