फतेहपुर। स्वच्छ भारत मिशन योजना के अंतर्गत पूर्व प्रधान और दो सचिवों ने मिलकर 11.52 लाख का गबन किया है। इसका खुलासा एक महिला की शिकायत पर हुआ। शिकायत पर गठित जांच कमेटी ने पड़ताल की तो पता चला कि 132 शौचालयों को कागजों में दिखाकर भुगतान कराया गया है।
अब जिलाधिकारी अपूर्वा दुुबे ने गबन की गई धनराशि की रिकवरी का आदेश दिया है। दोनों आरोपी सचिवों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।
हसवा ब्लॉक के बेराव गांव की प्रीती सिंह ने डीएम और सीडीओ से शिकायत कर बताया कि ग्राम पंचायत में उतने शौचालय बने नहीं हैं, जितने का भुगतान कराया गया है।
उन्होंने पूर्व प्रधान धर्मेंद्र सिंह और ग्राम विकास अधिकारी विपिन कुमार व आशीष कुमार पांडेय पर आरोप लगाए। प्रकरण की संवेदनशीलता देखते हुए सीडीओ सत्य प्रकाश ने छह अधिकारियों की एक जांच कमेटी गठित की थी।
कमेटी में युवा कल्याण अधिकारी मनोज कुमार की अध्यक्षता में बहुआ, मलवां, विजयीपुर, हसवा और धाता ब्लॉक के क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारियों की टीम ने पूरी ग्राम पंचायत के शौचालयों की पड़ताल की।
जिसमें पांच वर्ष के कार्यकाल में अलग-अलग वित्तीय वर्षो में 61 शौचालयों का 7.32 लाख, 32 शौचालयों का 3.84 लाख और 35 शौचालयों का 4.20 लाख रुपये के फर्जी भुगतान का प्रमाण मिला। इस तरह जांच में स्पष्ट हुआ कि कुल 132 शौचालयों के नाम पर 11.52 लाख की सरकारी धनराशि का पूर्व प्रधान और विकास अधिकारियों ने बंदरबांट किया है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर सीडीओ ने गबन की रकम की पूर्व प्रधान और सचिवों से बराबर-बराबर वसूली करने का आदेश दिया है। इसी मामले में डीएम ने दोनों सचिवों के विरुद्घ विभागीय कार्रवाई के लिए जिला विकास अधिकारी एमपी चौबे को निर्देश दिए हैं।