फतेहपुर। मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले अव्यवस्थाओं के चलते मजाक बनकर रह गए हैं। रविवार को लगने वाले आरोग्य मेलों में डॉक्टरों के पहुंचने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कहीं डॉक्टर नदारद रहे तो कहीं फार्मासिस्ट नहीं पहुंचे। लैब टेक्नीशियन के अभाव में मरीजों को बाहर जांच कराने के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है।
बहुआ पीएचसी में मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेला डॉक्टर के न होने से मरीजों के लिए बेमकसद साबित हुआ। कई मरीज बिना इलाज कराए लौट गए। फार्मासिस्ट अनिल वर्मा और वार्ड बॉय बबलू कुमार ने मरीजों को देखा। फार्मासिस्ट ने बताया कि सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार के 20 मरीजों का इलाज किया गया।
सीएमओ डॉ. यूबी सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में सभी अस्पतालों में डॉक्टर समेत समस्त स्टाफ का पहुंचना अनिवार्य है। मेले में न पहुंचने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फार्मासिस्ट के भरोसे आरोग्य मेला
उप स्वास्थ्य केंद्र बकेवर में मुख्यमंत्री आरोग्य मेला डॉक्टर विहीन रहा। फार्मासिस्ट वीरेंद्र कुमार, प्रयोगशाला सहायक अखिलेश कुमार और एएनएम अलका सिंह मौजूद थीं। सुबह 10.30 बजे तक कोई मरीज अस्पताल नहीं पहुंचा। फार्मासिस्ट ने बताया कि उप स्वास्थ्य केंद्र में सभी दवाएं उपलब्ध हैं।
22 मरीजों में निपटा मेला
औंग स्वास्थ्य केंद्र में मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में डॉ. राजन ने मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। कुल 22 मरीज पहुंचे। इनमें 14 पुरुष और आठ महिलाएं थीं। डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल में कुत्ता काटने और सांप के डसने के इंजेक्शन उपलब्ध हैं।
बिना डॉक्टर व स्टॉफ के चल रही पीएचसी
जाफरगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रविवार को आरोग्य मेले में सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार से पीड़ित 30 मरीज पहुंचे। केंद्र में लंबे समय से प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, लैब टेक्नीशियन, वार्ड बॉय और स्वीपर के पद रिक्त हैं। इससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। मेले में सिर्फ फार्मासिस्ट ने मरीजों को देखा।
फोटो-53-बहुआ पीएचसी में डाक्टर विहीन कुर्सी। संवाद- फोटो : सांकेतिक
फोटो-53-बहुआ पीएचसी में डाक्टर विहीन कुर्सी। संवाद- फोटो : सांकेतिक