सदर अस्पताल की ओपीडी मेें मरीज देखते सीएमएस डॉ. एके मिश्रा
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यमुना पट्टी के गांवों में संक्रामक बीमारियों का जाल फैलता जा रहा है। कई दिनों से वायरल बुखार समेत जोड़ों में दर्द से दहशतजदा सरहन बुजुर्ग गांव के बाद अब मकरंदपुर भी इसमें शामिल हो गया है। खसरा फैलने की जानकारी पर गुरुवार को स्थानीय सीएचसी की एक टीम पहुंची और लक्षण जानने की कोशिश की। उधर, स्वास्थ्य विभाग ने शरीर में उभरे दानों की वजह एलर्जी बताई है।
अमौली ब्लाक के इस गांव की भी आबादी अच्छी खासी है। कुछ दिन से यहां के लोगों को जुकाम और बुखार के साथ शरीर में दाना पड़ने की शिकायत हुई। दहशत तब फैल गई जब मंगलवार को इंद्रपाल रैदास की चार साल की बेटी शिवानी की मौत हो गई। ग्रामीणों के खौफजदा होने के बाद गुुरुवार को अमौली सीएचसी की डॉक्टर अर्चना सिंह की टीम पहुंची।
मुनादी कराकर जांच को एक स्थान पर बुलाना चाहा लेकिन ग्रामीण सामने नहीं आए। जिस पर टीम ने पूरे गांव का घूम-घूम कर सर्वे किया। जिसमें उन्हें गोविंद की पत्नी नीशू को तीन दिन से बुखार आने और शरीर में छाला दिखाई दिए। इसके अलावा सरविंद्र की बेटी अर्चना व अंजू और साहिल, राम बाबू के बेटे शुभम और रघुवीर के ढाई महीने के बेटे को भी यही शिकायत थी। सभी का परीक्षण कर नमूने लिए गए।
उन्हें दवाइयां भी दी गईं। सीएचसी के प्रभारी डॉ. विमल चौरसिया का कहना है कि जिला मुख्यालय से स्वास्थ्य टीम भेजकर ब्लड सैंपल की जांच कराई जाएगी। सैंपल लखनऊ भेजा जाएगा। फिर पुष्टि के बाद ही यह तय हो सकेगा कि यह चिकनपॉक्स है या नहीं। यह एलर्जी की वजह से दाना भी हो सकता है।
एपेडेमिक सेल के हेड डॉ. रमाकांत का कहना है कि देश से चेचक का सफाया हो चुका है। चूंकि गर्मी तेज पड़ रही है लिहाजा खुजली से शरीर में छोटे-छोटे दाने पड़ सकते हैं। इसके अलावा पैरासीटामॉल और एंटीबायटिक दवाओं का सेवन भी इसका कारण हो सकता है।