गंगा में जलस्तर बढ़ने से एक बार फिर पांडु नदी उफान पर आ गई है। नदी का पानी तेजी से खेतों में भर रहा है। इससे किसानों की धड़कनें दोबारा बढ़ने लगी हैं। खेतों से गांव की ओर पानी बढ़ता देख लोगों के चिंता का विषय बन गया है। बाढ़ का पानी किसानों के परवल, मक्का और अन्य हरी सब्जी की फसलों को बर्बाद कर रहा है।
पश्चिम में हुई बारिश से गंगा नदी का जलस्तर तीन दिन से थोड़ा-थोड़ा बढ़ रहा है। शनिवार को खतरे के निशान 100.860 मीटर के सापेक्ष 100.160 पर पहुंच गया है। खतरे का निशान से 700 सेंटीमीटर नीचे हैं। बता दें कि गंगा नदी का पानी बेनी खेड़ा गांव के पास की नई धारा से पांडु नदी में भर गया है। इससे नदी उफना गई है। वहीं शुक्रवार से फतेहपुर व कानपुर में हुई जोरदार बारिश से पांडु नदी का भी जलस्तर बढ़ा है। गंगा और पांडु नदी का बढ़ रहा पानी तटवर्ती ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। खेतों से गांव की ओर बढ़ रहे पानी को लेकर लोग परेशान हैं।
पांडु नदी की बाढ़ से प्रभावित गांव- दरियापुर, खानपुर, कालीकुंडी, मदारपुर, नयाखेड़ा, बड़ा खेड़ा, सदनहा, रामघाट, पेरीनारी, कलकत्ता फारम, बिंदकी फारम, अवसेरी खेड़ा, मल्हूखेड़ा, जाड़े का पुरवा, बेनी खेड़ा। ‘पांडु नदी के बाढ़ प्रभावित गांवों की राजस्व टीम से निरीक्षण कराया जा रहा है। तहसील स्तर से सभी क्षेत्रों की रिपोर्ट हर दिन ली जा रही है। गंगा और पांडु नदी का जलस्तर बढ़ा है, लेकिन गांवों में अभी बाढ़ का खतरा नहीं है।’ - आलोक सिंह, अपर जिलाधिकारी।
इन किसानों के खेतों में भरा पानी- थानपुर गांव के रामप्रसाद, रामभरोसे, रामलाल, ऊधौ, रामकरन, घनश्याम, किशोरी, मेवालाल निषाद। मदारपुर गांव के खेलावन, पुत्तन, मेवालाल, घसीटे, भोला, छैला, हेमराज, सुरेश, दयाशंकर के खेतों में बाढ़ का पानी भर गया है। दरियापुर के रामदास, बबली, मन्ना, टिर्री और बिंदकी फारम के जोगिंदर, भोला, रामशंकर, छोटेलाल निषाद की फसलें बाढ़ की चपेट में आ गई हैं।