बंद रहे शिवालय, श्रद्धालुओं ने दूर से टेका माथा
फतेहपुर। सावन के पहले सोमवार को शिवभक्तों ने गंगा में स्नान कर श्रद्धाभाव से पूजा अर्चना की। मंदिरों के कपाट बंद होने की वजह से गेट पर ही जलाभिषेक किया और भगवान शिव से सुख शांति का आशीर्वाद लिया। हालांकि कोरोना संक्रमण की वजह से भक्तों ने इस बार कांवड़ यात्रा नहीं निकाली है।
सावन के पावन महीने की शुरुआत सोमवार से हुई है, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से भगवान शिव के भक्त इस बार मंदिरों और शिवालयों के अंदर पूजन नहीं कर सके। मंदिरों और शिवालयों को बंद रखा गया और बाहर पुलिस बल की तैनाती की गई। वहीं इस बार कांवड़ यात्रा और जलाभिषेक पर पूरी तरह से रहा। मंदिरों और शिवालयों के आसपास की महिलाएं बंद कपाट में पहले सोमवार को पूजा करने पहुंचीं।
शिवालयों के बाहर ही गेट पर भगवान की पूजा की और गेट के बाहर ही भगवान शिव के नाम से जलाभिषेक किया। आचार्य पंडित दुर्गादत्त शास्त्री ने कहा कि सावन के महीने की शुरुआत कृष्ण पक्ष प्रतिपदा पांच जुलाई दिन रविवार सुबह 10.15 बजे से प्रारंभ हो गई थी, लेकिन उदया तिथि की वजह से छह जुलाई से सावन माना गया है।
पहली बार सावन में मंदिर में नहीं हुई पूजा
फतेहपुर। ऐसा पहली बार हुआ है कि सावन माह के पहले सोमवार को और शिवभक्त शिवालयों के अंदर नहीं पहुंच सके। इस बार तांबेश्वर धाम सहित जिले के प्रमुख शिव मंदिर में श्रद्धालु न तो शिवलिंग के दर्शन कर सके और न ही जलाभिषेक करने को मिला। तांबेश्वर धाम, थवईश्वर धाम, जागेश्वर धाम, कुंडेश्वर धाम, गूड़ेश्वर धाम जिले के प्रमुख शिवालय हैं। इनमें डीएम के निर्देश पर पहले ही कपाट बंद करा दिए गए हैं। अब तक सावन के सोमवार को उमड़ने वाली शिव भक्तों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग होती थी।