फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मानकों पर खरा नहीं उतरा फतेहपुरिया धान

विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में धान की फसल सरकार के मानकों पर खरा नहीं उतर रही है। केंद्र प्रभारियों और राइस मिल संचालकों के बार-बार विरोध करने पर डीएम ने टीम गठित कर संकर धान 6444 की टेस्टिंग कराई।
विज्ञापन

इसमें चावल की मात्रा मात्र 59 प्रतिशत निकली, जो मानक से आठ फीसदी कम है। चावल में टूटन 55 प्रतिशत और डैमेज 10 प्रतिशत रहा, जो मानक से कहीं ज्यादा है। जांच टीम ने धान की गुणवत्ता की हकीकत डीएम संजीव सिंह को दे दी है और सरकारी मानकों में संशोधन कराने के लिए शासन को रिपोर्ट भेजने की बात कही है।
सरकारी रेट पर किसानों का धान खरीदने के लिए जिले में 67 क्रय केंद्र खोले गए हैं। इन क्रय केंद्रों में किसानों के उसी धान की तौल होगी, जिसके एक क्विंटल धान में 67 किलो चावल निकलेगा। इसकी जिम्मेदारी केंद्र प्रभारी के अलावा राइस मिलर्स की होती है। सरकारी क्रय केेंद्रों पर तौल कराए गए धान को अनुबंध वाली राइस मिलों में केंद्र प्रभारी द्वारा भेजा जाता है। राइस मिल में धान पहुंचने पर मिलर्स की जिम्मेदारी होती है कि एक क्विंटल धान के बदले 67 किलो चावल एफसीआई के गोदाम में जमा करे। उसमें भी टूटन, डैमेज, कंकड़ की मात्रा शासन से तय की जाती है।
विज्ञापन

सरकार के मानक और किसानों के धान की गुणवत्ता को लेकर केंद्र प्रभारी व राइस मिलर्स विरोध कर रहे हैं। पिछले दिनों राइस मिलर्स ने डीएम से मिलकर अपनी समस्या को भी रखा था। डीएम संजीव सिंह ने इस बात को संज्ञान में लेकर एसडीएम सदर के नेतृत्व में टीम गठित कर धान की जांच कराने के निर्देश दिए। गुरुवार को जिला खाद्य विपणन अधिकारी रमेश कुमार श्रीवास्तव, एआर को-ऑपरेटिव रामनयन सिंह, मंडी सचिव अनिल यादव और एफसीआई क्वालिटी मैनेजर आनंद अवस्थी ने श्रीशीतला राइस मिल थरियांव में धान की टेस्टिंग कराई तो धान मानकों पर खरा नहीं उतरा।
तय मानकों के तहत प्रति क्विंटल धान में चावल 67 फीसदी होना चाहिए। लेकिन टेस्टिंग में यह 59 फीसदी ही निकला। धान में 17 फीसदी नमी होनी चाहिए जो सामान्य थी। डैमेज चार फीसदी निर्धारित है लेकिन टेस्टिंग में यह 10 फीसदी निकला। टूटन का मानक 25 फीसदी निर्धारित है लेकिन टेस्टिंग में यह 55 फीसदी निकली। यानि मानकों के मामले में धान कहीं भी खरा नहीं उतरा है। अब मानकों में संशोधन के लिए डीएम की ओर से रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। वहां से मिले दिशा निर्देश के बाद ही धान खरीद में तेजी आने की संभावना है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें