फतेहपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का विरोध करने पर आउटसोर्सिंग कर्मचारी की सेवा समाप्त कर दी गई। मेडिकल कॉलेज में ईसीजी टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत कर्मी ने शासन को पत्र भेजकर सेवा समाप्त करने, तीन महीने का वेतन काटने और मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने निष्पक्ष जांच कर दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई और संविदा के आधार पर पुनर्नियुक्ति की मांग की है।
शासन को भेजे शिकायती पत्र में पीड़ित रवि गुप्ता ने बताया कि वह मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजी/ईसीजी टेक्नीशियन के रूप में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत थे। नियुक्ति के समय अधिकारियों ने उनसे फिलहाल मल्टीपर्पज हेल्थ केयर में कार्य करने और बाद में ईसीजी टेक्नीशियन के पद पर समायोजित करने का आश्वासन दिया था।
आरोप है कि करीब डेढ़ वर्ष बाद भी जब उन्होंने इस संबंध में जानकारी मांगी तो बताया गया कि संस्थान में ऐसा कोई पद स्वीकृत नहीं है। जबकि उनसे लगातार ईसीजी का कार्य कराया जाता रहा।
प्रशिक्षित कर्मचारी की जगह वार्ड बॉय से कराया जा रहा था ईसीजी का काम
शिकायतकर्ता रवि गुप्ता का आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान प्रशिक्षित टेक्नीशियन के बजाय वार्ड बॉय और अप्रशिक्षित कर्मचारियों से ईसीजी कराया जा रहा था। उन्होंने इसे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए अफसरों के संज्ञान में लाया। इसके बाद उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। ड्यूटी से इतर कई असंगत कार्यों में लगाया गया। विरोध करने पर तीन माह का वेतन काट लिया गया और बाद में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
अधिकारी पर गंभीर आरोप, जांच की मांग
शिकायत में तत्कालीन संबंधित अधिकारी डॉ. नरेश विशाल के कार्यकाल में विभिन्न अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े समाचार प्रकाशित होने का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने समाचार पत्रों की कटिंग शासन को उपलब्ध कराने की बात कही है। आरोप लगाया कि उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे अनुचित कार्य कराने का दबाव बनाया गया। उन्होंने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। बीते 18 मार्च को माताजी और 23 मार्च को पिताजी का निधन हो गया। पत्नी लिवर की बीमारी से पीड़ित हैं और दो छोटे बच्चे हैं। शिकायतकर्ता ने स्वयं को दिव्यांग बताते हुए कहा कि नौकरी समाप्त होने से परिवार गंभीर आर्थिक संकट में आ गया है।
शासन स्तर पर ईसीजी टेक्नीशियन का कोई स्वीकृत पद नहीं है। संबंधित कर्मचारी मल्टीपर्पज वर्कर के पद पर कार्यरत है। इसकी ड्यूटी आवश्यकता के अनुसार कहीं भी लगाई जा सकती है। कर्मचारी के विरुद्ध अनैतिक गतिविधियों की शिकायत पर गठित जांच समिति ने आरोपों को सही पाया था। इसके बाद उसे हटा दिया गया। संबंधित कर्मचारी की पत्नी ने भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराने का लिखित माफीनामा दिया है जिस पर विचार किया जा रहा है।
- डॉ. आरके मौर्य, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।