फतेहपुर। मौसम की बेरुखी और बिजली की जबरदस्त कटौती ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिन किसानों ने किसी तरह से पहले धान की रोपाई कर ली है, अब तेज धूप में फसलें सूखने लगी है। बिजली न मिलने से धान की सिंचाई नहीं हो पा रही है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
किसानों को जरूरत के समय एक बार फिर से बिजली व्यवस्था बेपटरी हो गई है। सिंचाई के लिए इस समय न तो बारिश हो रही है और न ही ट्यूबवेलों में बिजली मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्र के सभी उपकेंद्र ओवरलोड हैं। हालांकि समस्या से निपटने के लिए फीडरों को दो-तीन हिस्से में बांट दिए गए हैं। एक-एक दिन आपूर्ति की जा रही है। उसमें भी लो-वोल्टेज की समस्या और मशीनों की ट्रिपिंग बार-बार होती है। सबसे अधिक थरियांव, असोथर,
बहुआ, धाता उपकेंद्र में बिजली की समस्या है। थरियांव उपकेंद्र के मंडासरांय फीडर से करीब 50 ट्यूबवेल चलते हैं। एक दिन थरियांव, आलमपुर, लक्ष्मणपुर, शिवपुर, मलांव, खरसोला गांव को बिजली दी जाती है। दूसरे दिन सेमरइया, नौबस्ता, मंडासरांय, सखियांव, भैरमपुर गांव और तीसरे दिन मुरांव, उदईसरांय, घूरी, धनाजीपुर, सुकुई, सेमरा, प्रयागदासपुर गांव को बिजली दी जाती है। यानी एक ट्यूबवेल को तीसरे दिन बिजली मिलती है। उसमें भी 440 वोल्टेज के बदले मात्र 200 वोल्टेज करंट मिलता है। इससे किसान फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं।