फतेहपुर। लॉकडाउन ने आम आदमी की जिंदगी को तगड़ा झटका दिया है। तेलियानी ब्लाक के नसीरपुर बेलवारा गांव के ननकऊ इसकी बानगी हैं। लाखों-करोड़ों कीमत के हीरे तराशने वाले ननकऊ को फावड़ा थामना पड़ गया। इनकी बसर मनरेगा से हो रही है। इन दिनों मिट्टी पुराई के काम में लगे हैं।
तेलियानी ब्लाक के नसीरपुर बेलवारा गांव में मनरेगा से मिट्टी पुराई हो रही है। गांव के ननकऊ 132 नंबर जॉबकार्ड की पहचान पर मिट्टी पुराई कर रहे हैं। इससे पहले ननकऊ ने सार्वजनिक शौचालय के निर्माण में भी काम किया है। ननकऊ अठारह साल से गुजरात के अहमदाबाद में सराफा कारोबारी की फर्म में हीरे तराशने का काम कर रहे थे। इस काम के बदले हर महीने पंद्रह हजार पगार मिलती थी। लॉकडाउन में काम बंद हुआ तो तीन अप्रैल
को गांव लौट आए। जमा पूंजी से कुछ दिन खर्च चलता रहा। पैसे खत्म हुए तो परिवार चलाने के लिए फावड़ा थामना पड़ गया। ननकऊ गांव के दूसरे श्रमिकों की तरह मनरेगा में मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। ननकऊ ने बताया कि दो बच्चे हैं। खेती एक बीघे से भी कम है। ऐसे हालातों में जो काम सामने आ जाता, कर लेते हैं। उन्होंने बताया कि रोज 202 रुपये मिलते हैं। इससे परिवार के खर्चे चल जाते हैं।
सीडीओ सत्य प्रकाश ने बताया कि मनरेगा में काम करने वालों की संख्या 72 हजार से अधिक पहुंच गई है। प्रवासी श्रमिकों को काम उपलब्ध कराया जा रहा है। लोगों को उनके ही गांव में रोजगार के साधन उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा बढ़िया माध्यम साबित हो रही है।