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स्वावलंबन की राह पर बढ़ रहीं ग्रामीण महिलाएं

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फतेहपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने गांव की महिलाओं के हुनर को मुफीद प्लेटफार्म देने का काम किया है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र से लेकर हालिया जरूरत फेस मास्क तैयार करने वाली महिलाएं हरेक क्षेत्र में स्वावलंबन की मिसाल पेश कर रही हैं। जिस तेजी से स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का सिलसिला जारी है । उससे जल्द ही स्वावलंबी महिलाओं का आंकड़ा एक लाख पार करना तय हैं।
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ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए वर्ष 2014 में जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की शुरुआत हुई थी। मिशन के तहत गांव-गांव समूह खोले गए। मिशन से जुड़ी महिलाएं कई तरह की गतिविधियों में नजर आ रही हैं । कामकाज के दौरान उनका हौसला उनके स्वावलंबन की मिसाल पेश कर रहा है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नाम कमाने वाली गांव की महिलाएं इनवर्टर बल्ब तैयार कर रही हैं। लाकडाउन के दौरान पचास हजार मास्क बनाने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के हाथ का बना आचार कोरोना कम्युनिटी सेंटर के जरिए संक्रमित मरीजों को परोसा जा रहा है।
मौजूदा वक्त जिले में 9790 स्वयं सहायता समूह काम कर रहे हैं । इन समूहों से 96,846 महिलाएं जुड़ चुकी हैं। ब्लाक बार बात करें तो ऐराया ब्लाक के 710 स्वय सहायता समूह से 7394 महिलाएं जुड़ी हैं। अमौली ब्लॉक के 854 स्वयं सहायता समूह से 8816 महिलाएं काम कर रही हैं । असोथर ब्लाक के 545 स्वयं सहायता समूह में 5348 महिलाएं जुड़ी है । बहुआ ब्लाक के 492 स्वयं सहायता समूह में 4881 महिलाएं हैं। भिटौरा ब्लाक के 1074 स्वयं सहायता समूह से 10985 महिलाएं जुड़ी हैं। देवमई ब्लॉक के 834 स्वयं सहायता समूह में 7746 महिलाएं काम कर रही हैं। धाता ब्लाक के 540 स्वयं सहायता समूह में 5382 महिलाएं जुड़ी हैं। हसवा ब्लाक के 999 स्वयं सहायता समूह से 9938 महिलाएं वास्ता रखती हैं। हथगाम ब्लाक के 919 स्वयं सहायता समूह से 9330 महिलाएं जुड़ी हैं। खजुहा ब्लॉक के 586 स्वयं सहायता समूह में 5745 महिलाएं काम कर रही हैं। मलवा ब्लाक के 906 स्वयं सहायता समूह से 8818 महिलाओं की जीविका चल रही है। तेलियानी ब्लाक के 796 स्वयं सहायता समूह से 7744 महिलाओं का जुड़ाव है। विजयीपुर ब्लॉक के 532 स्वयं सहायता समूह से 4819 महिलाएं जुड़ी हुई है।
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कोट्स..
- गांव की महिलाओं से अच्छे परिणाम हासिल हो रहे हैं । उनमें सीखने की ललक के साथ कुछ कर गुजरने की चाहत है। भिटौरा ब्लाक में ही अकेले हजार से ज्यादा स्वयं सहायता समूह चल रहे हैं। इन समूहों से दस हजार से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं। स्कूल ड्रेस की सिलाई के लिए पांच सौ महिलाओं को चिह्नित कर लिया गया है। - मोहित शशांक शुक्ला, जिला मिशन प्रबंधक, एनआरएलएम
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