फतेहपुर। कोरोना संक्रमण के मंडरा रहे खतरे की वजह से सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों में शल्य प्रसव की रफ्तार में कमी आई है । ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ऑपरेशन से पहले प्रसव पीड़िता की कई तरह की जांच करवानी होती हैं। अस्पताल का स्टाफ नहीं चाहता कि वह प्रसव पीड़िता के संपर्क में ज्यादा रहे। यही वजह हैं कि सभी तरह के अस्पतालों में सामान्य प्रसव को ही पहली वरीयता जा रही है ।
बता दें कि सीजर डिलीवरी से पहले हीमो ग्लोबिन, सीबीसी, एचआईवी, एचबीएसएजी और अल्ट्रासाउंड की दरकार होती है। कोरोना संक्रमण की वजह से अब कोविड-19 की भी जांच जरूरी हो गई है। ऐसी दशा में डॉक्टर और अस्पताल का स्टाफ प्रसव पीड़िता के ज्यादा संपर्क में नहीं रहना चाहता है । यही वजह है कि सीजर डिलीवरी की बजाय नॉर्मल डिलीवरी को वरीयता दी जा रही है । दरअसल नॉर्मल डिलीवरी से पहले सिर्फ हिमोग्लोबिन और एचआईवी की ही जांच होती है । लिहाजा नॉर्मल डिलीवरी को ही फिलहाल बढ़ावा दिया जा रहा है । स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर फरमाएं तो अप्रैल महीने में सरकारी अस्पतालों में 1415 सामान्य प्रसव हुए । निजी
अस्पतालों में इनकी तादाद 360 रही । वही सीजर ऑपरेशन की बात करें तो जिला महिला अस्पताल में 26 और हरदो सीएससी में चार सीजर डिलीवरी हुई । जबकि एफआरयू सेंटर बिंदकी सीएससी में एक भी सीजर ऑपरेशन नहीं हुआ । इसके सापेक्ष पिछले साल अप्रैल महीने में सरकारी अस्पतालों में 1388 नॉर्मल डिलीवरी हुई थी । निजी अस्पतालों में 456 नॉर्मल डिलीवरी कराई गई थी । सीजर डिलीवरी की बात करें तो जिला महिला अस्पताल में 32 बच्चे पैदा हुए । बिंदकी और हरदो सीएससी में एक एक डिलीवरी हुई थी । मई महीने की बात करें तो सीजर डिलीवरी का ग्राफ और गिरा है । एआरओ महेंद्र सिंह लोधी भी मानते हैं कि सीजर डिलीवरी में कमी आई है । ऐसा इसलिए है कि पूरी फैसिलिटी नहीं मिल पा रही है ।