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लॉकडाउन ने रोकी बैंडबाजा करोबारियों की रफ्तार

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खागा। लोगों के घर में जब खुशी का मौका आता है तो इनके घर में भी रोजी की व्यवस्था होती है। अपने बैंड की धुनों पर सबको झूमने पर मजबूर करने वाले ऐसे ही कई परिवार आज थम से गए हैं। कोई दूसरा व्यापार नहीं होने के कारण ऐसे लोग दो जून की रोटी के लिए हाथ पैर मार रहे हैं। कुछ मजदूरी करके गुजर बसर करने को मजबूर हैं। जबकि कुछ जो पहले दर्जन भर लोगों को नौकरी देते थे वह खुद नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं।
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गदाई मोहल्ला निवासी कैलाश सविता कहते हैं कि उनकी जिंदगी अधर में लटक गई है। लॉकडाउन में रोजगार ठप होने से जीवन में अंधेरा सा छा गया है। फरवरी में आखिरी कार्यक्रम करने के बाद से आज तक एक रुपया नहीं कमाया है। जो हालात बन रहे हैं, उससे तो लग रहा उनके साथी देर-सवेर नए रोजगार में जुड़ जाएंगे।
खखरेरू के मुन्नाअली का कहना है कि लगभग 40 साल से लगातार बैंड पार्टी चलाकर परिवार का पालन पोषण कर रहा हूं। पार्टी मे सात लोगों का परिवार चल रहा था। लॉकडाउन में काम न होने के कारण बच्चों को पालन मुश्किल हो गया है। सरकार की ओर से भी कोई लाभ नहीं मिल रहा।
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खखरेरू के जुग्गीलाल ने बताया कि लगभग 26 साल से बैंड पार्टी चला कर परिवार का पालन पोषण करते रहे। परिवार में छह लोग हैं। इसी तरह से हरदासपुर के गुरु प्रसाद ने बताया कि 20-22 साल से बैंड पार्टी चला रहे हैं। संक्रमण के चलते उनके परिवारों की हालत बेहद ही खराब हो गई है। डीजे वाले संदीप केसरवानी का कहते हैं कि दोनों बच्चों की पढ़ाई का संकट गहरा गया है। वहीं शिव बाबू का कहना है कि तीन बच्चे हैं इनकी परवरिश कैसे होगी कुछ समझ नहीं आ रहा है। ऐरायां ब्लाक के कोडारवर गांव निवासी अखिलेश का कहना है कि बैंडबाजा छोड़कर फावड़ा चलाना पड़े तो चला लेंगे। जिंदगी के एक कड़वे सच का अहसास हुआ है कि दुनिया में सब दिखावा है। बढ़ैयापुर निवासी राजकुमार कहते हैं कि काहे का बैंडबाजा भैया, अब तो अपना ही बैंड बजा पड़ा है। बैंड का सामान उठाकर छत पर रख दिया है। ये तो कहो कि मनरेगा जॉबकार्ड बना हुआ है। मजदूरी कर गुजर बसर करेंगे।
इनसेट-
सारथी बने ग्राम प्रधान
कोडारवर के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि वीरेंद्र पटेल ने आगे बढ़कर बैंडबाजा वालों का हाथ थामा है। वह कहते हैं कि सभी बाजा वालों को अगर समस्या होगी तो सभी का जॉबकार्ड बनाकर उन्हें रोजगार दिया जाएगा।
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