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स्वास्थ्य कर्मियों व पुलिस पर की गई फूलों की बारिश

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फतेहपुर। समाजसेवी संगठनों ने कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव व राहत कार्य में लगे स्वास्थ्यकर्मियों व पुलिस पर गुरुवार को फूलों की बारिश कर उनका हौसला बढ़ाया। जिला अस्पताल व पटेल नगर चौराहा पर यह आयोजन हुआ।
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नारी स्मिता फाउंडेशन रोटी घर की संचालिका स्मिता सिंह के नेतृत्व में सीएमएस डॉ. प्रभाकर, डॉ. विवेक निगम, डॉ. सुरेश सचान, डॉ. नरेश विशाल, रेखा चंदेल, स्टाफ नर्स प्रीती, अंजली, अरविंद आदि रहे। फाउंडेशन की ओर से प्रसून तिवारी, विवेक मिश्रा, अंकित सिंह चौहान भी रहे। सरदार वल्लभ भाई पटेल फाउंडेशन ने पटेलनगर चौराहे पर पुलिस कर्मियों के साथ सीओ सिटी केडी मिश्रा और कोतवाल रवींद्र श्रीवास्तव का स्वागत किया गया। मुख्य ट्रस्टी राजेश सिंह पटेल, कैलाश द्विवेदी, आत्माराम तिवारी, आशीष सिंह, एहतराम, राजनारायन, लालजी, पटेल, अमोल सचान आदि मौजूद रहे।
बाइस दिन से नहीं गए घर
कोरोना से जंग में उतरे जांबाज डाक्टरों ने बयां किया हाल
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। कोरोना मरीजों को चिह्नित करने, उनकी जांच कराने से लेकर क्वारंटीन में रखकर उन्हें ठीक कराने तक की लड़ाई में जुटे चिकित्सकों ने पिछले कई दिनों से अपने घर का मुंह नहीं देखा है। ये डॉक्टर एक दिन में बारह से चौदह घंटे तक की ड्यूटी कर मरीजों की सेवा कर रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में जब हर किसी को घर से बाहर निकलने की मनाही है, तब चिकित्सक अपने सेवा धर्म में जी-जान से डटे हैं। चिकित्सकों से बात की गई, तो उन्होंने इस तरह से अपने अनुभव साझा किए।
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फोटो 6- डॉ. के.के. श्रीवास्तव
कोरोना सेल के प्रभारी डॉ. के.के. श्रीवास्तव कहते हैं पूरा परिवार कानपुर में है और उन्होंने पिछले बीस दिनों से घर का मुंह नहीं देखा है। घर में मां, पत्नी और बच्चे सभी चिंतित हैं और हर रोज फोन पर घर आने को कहते हैं। एक दिन में बारह से चौदह घंटे तक ड्यूटी कर रहे हैं। कई बार तो घर के फोन उठाने का भी मौका नहीं मिलता और शाम तक इतना थक चुके होते हैं कि बात करने की हिम्मत नहीं बचती।
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फोटो 7- डॉ. अब्दुल्ला
कोरोना सेल में काम कर रहे महामारी विज्ञानी डॉ. अब्दुल्ला बताते हैं कि प्रयागराज जनपद में परिवार रहता है। बड़ा बेटा चार साल का है और छोटा डेढ़ साल का। पत्नी पूरा घर और दोनों बच्चे अकेले संभाल रही है। बाइस दिन घर जाने का मौका नहीं मिला और न ही बच्चों का चेहरा देखा है। जितनी बार घर से फोन आता है, आश्वासन दे देते हैं कि जल्द ही आ रहे हैं, लेकिन जाने का न तो वक्त मिल रहा है और न ही अब स्थितियां रह गई है।
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