हाइवे में रिक्से से जाते बिहार के मजदूर
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। लॉकडाउन के चलते महानगरों से अपने घरों को लौट रहे मजदूरों में विपरीत परिस्थितियों में भी गजब का हौसला देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में जब लोग डरे हु़ए हैं, तब अपने घरों को लौट रहे प्रवासी मजदूरों की हिम्मत अपने जैसे अन्य लोगों के लिए प्रेरणा बन रही है। साधन की उपलब्धता न होने से मजदूर खुद ही रिक्शे चलाकर ही अपने घरों को निकल पड़े हैं। रविवार रात राष्ट्रीय राजमार्ग पर ऐसा ही नजारा देखने को मिला।
फतेहपुर। कानपुर से प्रयागराज जाने वाले हाईवे में रात साढ़े दस बजे 53 वर्ष के नरेश शाह रिक्शा खींचते हुए मिले। रिक्शे के पिछले हिस्से में अशोक शाह और संतोष बैठे हुए थे। पूछने पर इन्होंने बताया कि दिल्ली के सदर बाजार इलाके में इसी रिक्शे में सामान ढोने का काम करते हैं। वहां काम बंद हुआ खाने के भी लाले हो गए, इसलिए बिहार के अपने गृह जनपद खगरिया के लिए रिक्शे से ही निकल पड़े। रास्ते में जिसने जो खाने को दे दिया, उसी से काम चल गया।
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फतेहपुर। हसवा पुलिस चौकी के पास 22 साल का लालू कुमार और 26 साल का संतू यादव रिक्शा लेकर बिहार के बेगूसराय के लिए जाते हुए मिले। दोनों ने अपने रिक्शों में अपने साथियों को बिठाया हुआ था। पूछने पर बताया कि दिल्ली में मजदूर करते हैं, वहां अब कुछ नहीं बचा तो गांव जा रहे हैं। इन्हें हसवा पुलिस चौकी प्रभारी प्रशांत कटियार ने रोक कर भोजन कराया और इनके सोने का भी प्रबंध किया। सात मजदूर तीन रिक्शों से दिल्ली से बिहार के जिलों के लिए 1200 से 1500 किमी की दूरी तय करने निकल पड़े थे। एक साथी थक जाता तो दूसरा उसे आराम देने के लिए खुद रिक्शा चलाने लगता और दूसरे को बैठा लेता।
हाइवे में रिक्से से जाते बिहार के मजदूर- फोटो : FATEHPUR