फतेहपुर। मौरंग खदान से निकलने वाले वाहनों से जिला पंचायत पर्ची देकर कर वसूल कर रहा है। लगातार कई शिकायत आने पर डीएम ने मामले में जांच बैठा दी है। डीएम ने बताया कि सीडीओ सत्य प्रकाश की अध्यक्षता में गठित कमेटी मामले की पड़ताल करेगी। हालांकि प्रशासन की यह तेजी उच्च न्यायालय के आदेश के बाद देखने को मिली है।
मौजूदा समय में जनपद में पांच मौरंग खदानें संचालित हो रही हैं। मौरंग लादकर निकलने वाले वाहनों से जिला पंचायत कर वसूली कर रही थी। इस वसूली का पिछले कई हफ्तों से मौरंग ढुलाई करने वाले वाहन संचालक विरोध कर रहे थे। जिला पंचायत की वसूली की वैधता पर सवाल भी उठ रहे थे। हालांकि इस वसूली पर जिला पंचायत का तर्क है कि उन्हें शासनादेश के तहत कर वसूली कराने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने ई-टेंडर के जरिए दो संस्थाओं को पांच खदान क्षेत्रों से कर वसूली के अधिकार दिए हैं।
जिला पंचायत की इस कर वसूली का मोटर मालिक विरोध कर रहे थे। इसी विरोध के चलते कर वसूली कर रही फर्म एमएस कंस्ट्रक्शन और अन्य हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन से कर वसूली की वैधानिकता पर जवाब मांगा है। प्रशासन ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए जिला पंचायत के शासनादेश और ई-टेंडर व्यवस्था का हवाला दिया। अब इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर जिलाधिकारी संजीव सिंह ने शासनादेश समेत जिला
पंचायत की कर वसूली की प्रक्रिया की वैधानिकता की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। डीएम ने बताया कि सीडीओ सत्य प्रकाश की अध्यक्षता में गठित कमेटी पूरे प्रक्रिया की पड़ताल करेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कोई अग्रिम कदम उठाया जाएगा। वहीं इस मसले पर जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी लालता प्रसाद ने बताया कि किसी भी प्वाइंट पर बैरियर लगाकर वसूली करने जैसी कोई बात नहीं है। संस्था के लोग रेट बोर्ड लगाकर बैठते हैं और प्वाइंट से गुजरने वाले वाहनों से कर वसूली निर्धारित दरों पर ही करते हैं।
जिला पंचायत की ओर से अढ़ावल, रामनगर कौंहन, रानीपुर, गढ़ीवा मझिगवां और सलेमपुर में वसूली की जा जाती है। वसूली के लिए जिला पंचायत ने एम.एस. कंस्ट्रक्शन और शानू कंस्ट्रक्शन नाम की फर्मों को काम दे रखा है।