फतेहपुर। नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में पीड़ित परिवार को छह साल बाद न्याय मिला। गुरुवार को प्रकरण की सुनवाई के बाद अपर जिला जज और विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट पारुल श्रीवास्तव ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोषी पर 55 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की पूरी धनराशि पीड़िता को बतौर क्षतिपूर्ति देय होगी।
घटना शहर कोतवाली क्षेत्र के एक मुहल्ले में 27 नवंबर 2014 को घटित हुई थी। शहर के खंभापुर का चालीस वर्षीय अंसार अहमद रिक्शा चलाता था। घटना के दिन वह कोतवाली क्षेत्र के एक मुहल्ले से गुजर रहा था कि उसकी नजर आठ साल की मासूम बच्ची पर पड़ी। उसने उसे बहला फुसलाकर रिक्शे में बिठा लिया। जंगल ले जाकर पहले शराब पी और बच्ची से दुष्कर्म किया। घटना के बाद जैसे-तैसे बच्ची भागकर अपने घर पहुंची। दो
दिन बाद अंसार अहमद फिर से रिक्शा लेकर पीड़िता के मुहल्ले पहुंचा तो पीड़िता ने उसे पहचान लिया और चिल्लाकर घरवालों को बुला लिया। घरवालों ने अंसार को पुलिस के हवाले कर दिया। तब से वह जेल में था। मामले की सुनवाई अपर जिला जज और विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट पारुल श्रीवास्तव ने की। सहायक
शासकीय अधिवक्ता सहदेव गुप्ता ने अदालत के समक्ष एक के बाद एक मां-बेटी सहित पांच गवाह प्रस्तुत किए। गवाहों और साक्ष्यों को मद्देनजर रखते हुए अदालत ने आरोपी अंसार अहमद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने आरोपी पर 55 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अपने आदेश में अपर जिला जज पारुल श्रीवास्तव ने कहा है कि अर्थदंड की पूरी धनराशि पीड़िता को बतौर क्षतिपूर्ति देय होगी।