फतेहपुर। अलग-अलग जगहों पर खांदी कटने का सिलसिला लगातार जारी है। रविवार रात हसवा कस्बे के टेक्सारी बुजुर्ग माइनर में खांदी हो गई। इससे करीब ढाई सौ बीघा खेत पानी से लबालब हो गए हैं। हफ्ते भर में नहर की चार शाखाओं में खांदी और एक माइनर ओवरफ्लो होने से हजारों बीघा फसल जलमग्न हो चुकी है। उधर, जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का पंजीकरण करा रखा है, उन्हें तो मुआवजा मिल जाएगा, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं, जिनका पंजीकरण नहीं है। ऐसे किसानों को मुआवजे के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
रामगंगा व निचली गंगा नहर की शाखाओं की सिल्ट सफाई कराने के लिए शासन से हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। रबी फसल की बुआई के पहले इस बार रामगंगा व निचली गंगा नहर का भी नवीनीकरण कराया गया है। साढ़े तीन महीना बाद जनवरी के पहले सप्ताह में सिंचाई का पानी नहरों में आया है। फसलों की सिंचाई करने वाले किसानों को जहां राहत मिली है। वहीं रजबहा व माइनरों में हो रही खांदी ने फसलों में तबाही मचा दी है।
खांदी के पानी से गेहूं की हजारों बीघा फसल डूब गई है। उन फसलों को बचाने के लिए किसान नाला व नालियों में खेत का पानी उतारने का काम कर रहे हैं। वहीं राई, सरसों, आलू की फसलों में पानी भर जाने की वजह से खराब हो चुकी हैं। इनके नुकसान की भरपाई के लिए न तो सिंचाई विभाग आगे आ रहा है और न ही प्रशासन सुनवाई कर रहा है। किसान इस बात से भी चिंतित हैं कि उनके मुआवजे की बात तो होती नहीं अलबत्ता यह आरोप जरूर लगा दिया जाता है कि अपने लाभ के लिए किसी किसान ने ही खांदी कर दी है।
2-टेक्सारी बुजुर्ग के किसान बाबू का कहना है कि गांव किनारे रात में खांदी हो गई। इसमें एक बीघा आलू और गेहूं की फसल में पानी भर गया है। आलू की फसल तो पूरी तरह से बेकार हो जाएगी। गेहूं की फसल से पानी उतारने का प्रयास किया जा रहा है। एक-दो दिन में पानी खेत से हट जाए तो फसल बचने की कुछ आस है।
3- टेक्सारी बुजुर्ग गांव के ही किसान फूलचंद्र का कहना है कि पिछले साल भी इसी महीना में माइनर में पानी आया था। तब भी खांदी कट गई थी और फसलों में पानी भर गया था। इसकी शिकायत डीएम व सिंचाई विभाग के अधिकारियों से की गई थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
4- असोथर क्षेत्र के घरवासीपुर गांव के किसान संतोष कुमार का कहना है कि बेरुई माइनर का टेल (अंतिम छोर) गांव की सीमा में बना हुआ है। हर साल माइनर ओवरफ्लो हो जाती है और खेत में पानी भर जाता है। रबी के सीजन में बोई जाने वाली फसल हर साल नष्ट हो जाती है।
5- घरवासीपुर गांव के किसान रामऔतार का कहना है कि सिंचाई विभाग ने गांव के किनारे टेल बना दिया है। उसको टेल प्वाइंट को नाला में जोडना चाहिए। ताकि अंतिम छोर में पानी पहुंचने के बाद माइनर ओवरफ्लो न हो। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
हफ्ता भर में यहां हुई खांदी
धाता क्षेत्र के भुरचुनी माइनर में 12 जनवरी को खांदी से 150 बीघा फसल जलमग्र हो गई थी। असोथर क्षेत्र के बुधरमऊ माइनर में 14 जनवरी को खांदी के पानी से 200 बीघा क्षेत्रफल में पानी भर गया था। सवंत रजबहा में 18 जनवरी को खांदी कटने से 400 से 500 बीघा क्षेत्रफल में पानी भर गया था। इससे फसलें जलमग्र हो गई हैं। रविवार की रात को टेक्सरी बुजुर्ग माइनर में खांदी कटने से 250 बीघा में पानी भरा हुआ है।
वर्जन
अधिशासी अभियंता जेपी वर्मा का कहना है कि नहर में खांदी होने पर नुकसान की भरपाई करने का विभाग से कोई नियम नहीं है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों के नुकसान की भरपाई की जाती है। जिन किसानों ने बीमा नहीं कराया है, उनके लिए एसडीएम व तहसीलदार की टीम जांच करती हैं। फिर उन्हें मुआवजा दिलाया जाता है।
वर्जन
सदर एसडीएम प्रहलाद सिंह का कहना है कि खांदी के पानी फसलों का नुकसान होने पर किसानों को यह सिद्ध करना होता है कि विभाग की लापरवाही से फसलें बर्बाद हुई हैं। तब नहर विभाग से मुआवजा मिलता है। खांदी काटने में किसानों का हाथ होने पर नहर विभाग जुर्माना भी वसूलता है।