फतेहपुर। बारिश में जहां रबी की फसलों को फायदा हुआ है। वहीं बदइंतजामी के चलते क्रय केंद्रों में पड़ा 64 सौ क्विंटल धान फिर से भीग गया है। बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सुबह होते ही किसान क्रय केंद्र पहुंच गए और बारिश से होने वाले नुकसान का ठीकरा केंद्र प्रभारियों पर फोड़ने लगे। किसानों का कहना है कि क्रय केंद्र बोरियां न होना और सुस्त ढंग से तौल होने के चलते उनकी उपज भीग गई। उधर, बारिश से शहर की सड़कें भी कीचड़ में बदल गई हैं।
बेमौसम बारिश से खरीफ की फसलों को फायदा हुआ है, लेकिन क्रय केंद्र में धान भीगने से किसानों को नुकसान हो गया है। इसकी वजह क्रय केंद्र बोरियां न होना और सुस्त ढंग से धान की तौल कराना है। शहर के मंडी समिति में दो हजार क्विंटल धान बारिश में भीग गया है। दिनभर आसमान में बादल होने की वजह से किसान उसे सुखाने के लिए फैला भी नहीं सके। तिरपाल व पन्नी लगाकर भीगे हुए धान को ढकने में लगे रहे। कुछ किसानों ने अपने
धान को मंडी समिति की टीनसेड के नीचे रख दिए हैं। बहुआ प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के लदिगवां क्रय केंद्र में 500 क्विंटल धान बारिश के पानी में भीग गया है। हालाकि धान बोरियों में भरा हुआ था, लेकिन ऊपर से तिरपाल न होने की वजह से काफी मात्रा में धान भीग गया है। थरियांव प्रतिनिधि के अनुसार कस्बा के क्रय केंद्र में तीन से चार हजार क्विंटल धान क्रय केंद्र में तौल के लिए रखा हुआ है। गुरुवार की रात में हुई बारिश से किसानों का धान भीग गया। मैदान में पानी भरने की वजह से किसानों को सुखाने की भी दिक्कत बन गई है।
रात में हुई हल्की बारिश से रबी की सभी फसलों को फायदा हुआ है। बारिश की बूंदे पड़ते ही गेहूं, आलू, चना, राई, सरसों और अरहर के फसलों की रौनक बदल गई है। बारिश से किसानों को एक हफ्ता फसलों की सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी। इससे सिंचाई में खर्च होने वाले रुपये की भी बचत हुई है। खासकर यमुना तिरहार की असिंचित फसलों को ज्यादा लाभ हुआ है।
बेमौसम बारिश और तापमान में गिरावट से खरीफ की फसलों में कीट व रोग लगने की संभावना बढ़ गई है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने गेहूं की फसल पीली गेरुई रोग से बचाव करने के लिए किसान प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी 500 मिली दवा को 600-700 लीटर पानी में घोलकर एक हेक्टेयर में छिड़काव करें। इसका दूसरा छिड़काव 10 से 15 दिन में करना होगा। चौड़ी पत्ती खरपतवार से बचाव करने के लिए टू-फोर-डी सोडियम साल्ट दवा 625 ग्राम व मेटसल्फ्युरान मिथाइल-20 दवा 20ग्राम 500 लीटर पानी में मिला कर दवा का छिड़काव करें। आलू की अगेती व पिछैती फसल में झुलसा रोग का प्रकोप बढ़ने की संभावना है।