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ज्वालागंज के आसपास मिठाई के छह नमूने फेल

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फतेहपुर। ज्वालागंज के आसपास कुछ मिठाई की दुकानों पर पेड़ा, रसगुल्ला, दूध से बने उत्पादों में अरारोट ज्यादा मात्रा में मिलाया जा रहा है। मामला बुधवार को तब पकड़ में आया जब जांच करने मुख्य खाद्य सुरक्षा विभाग की स्वचालित लैब वैन पहुंची। नमूना लिया गया और जांच में एक-दो नहीं छह नमूने फेल हो गए। सभी दुकानदारों को नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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स्वचालित लैब वैन को बुधवार सुबह डीएम संजीव सिंह ने कलक्ट्रेट से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसमें मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी के साथ बनारस के लैब कनिष्क विश्लेषक अरुण चौधरी ने शहर के ज्वालागंज, राधा नगर, पटेल नगर, आईटीआई रोड, बाकरगंज, पक्का तालाब मुहल्ला में मिष्ठान की दुकानों से 32 सैंपल लिए। ज्वालागंज के आसपास मिठाई के छह नमूना फेल हुए। इनमें अरारोट की मात्रा ज्यादा पाई गई। मुख्य खाद्य सुरक्षा
अधिकारी सीएल यादव ने बताया कि जिले में तीन दिन लैब वैन से अभियान चलेगा। शहर के अलावा खागा, बिंदकी तहसील में अलग-अलग दिन खाद्य सामग्री के नमूना लेकर जांच की जाएगी। इस लैब वैन की जांच से तुरंत रिपोर्ट मिल जाती है। जिन दुकानों का नमूना फेल हुआ है। उनके दुकानदारों को नोटिस जारी की जा रही है। इन पर जुर्माना की कार्रवाई होगी। इस मौके पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी अरविंद सिंह, रत्ना सिंह, रामबाबू मौजूद रहे।
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दूध या दूध के बने उत्पादों को गाढ़ा करने के लिए मिलावट करने वाले दुकानदार अरारोट मिलाते हैं। सदर अस्पताल में फिजिशियन डॉ. आरएम गुप्ता का कहना है कि यदि अरारोट अधिक मात्रा में है तो वह पेट के लिए घातक है। दरअसल अरारोट पेट में जाते ही आंतों में चिपक जाता है। इससे पेट में दर्द, ऐंठन, जी मिचलाना, अपच, डायरिया जैसे हालात हो सकते हैं। नियमित तौर पर इसका प्रयोग होते रहने पर यह पेट में अल्सर तक को जन्म दे सकता है।
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