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फैसले का विरोध जारी, व्यापारियों ने किया प्रदर्शन

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चूड़ी गली में खुली दुकाने - फोटो : FATEHPUR
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गुरुवार को साप्ताहिक बंदी और एक दिन छोड़कर दुकानें खोलने के नियम के विरोध में व्यापारियों ने आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया है।
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शहर की सबसे बड़ी और पुरानी चौक बाजार के व्यापारी भी शुक्रवार को सड़क पर उतर आए और नारेबाजी करते हुए प्रशासन के इस फैसले का विरोध किया। चेताया कि अगर जल्द इस फैसले को वापस नहीं लिया जाता है तो वह लोग आंदोलन को और तेज करेंगे।
शुक्रवार को चौक चौराहे पर व्यापारी नेता सत्य भगवान गुप्ता की अगुवाई में बड़ी संख्या में व्यापारी जुटे। व्यापारी नेता ने गुरुवार के फैसले पर आपत्ति करते हुए कहा कि जो नियम कायदे बनाए गए हैं, उनसे व्यापारी और व्यापार का भला नहीं होने वाला है।
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क्या एक पट्टी की दुकान खोलने से बाजार की भीड़ रोक ली जाएगी। शनिवार और रविवार को लॉकडाउन रहेगा, जबकि गुरुवार को साप्ताहिक बंदी से बाजार बंद रखने होंगे। इतना ही नहीं व्यापार करने के लिए जो चार दिन दिए जाने की बात कही जा रही है, उसमें भी दो दिन ही व्यापार किया जा सकेगा।
यह नियम व्यापारियों के हित में नहीं है। इस बारे में जिला प्रशासन को फिर से विचार करना चाहिए और साप्ताहिक बंदी को समाप्त कर सभी दुकानों को खोलने की स्वीकृति देनी चाहिए। इससे उनकी रोजी रोटी पर संकट खड़ा न हो।
कहा कि प्रशासन को केवल व्यापारी वर्ग पर सख्ती करने का कोई औचित्य नहीं बनता है। सामाजिक संक्रमण से बचाव के लिए जनता को भी जवाबदेह बनाना होगा।
कहा कि गुरुवार की बंदी को समाप्त कर बाजार का पूरी तरह से संचालन किया जाए। विरोध प्रदर्शन के दौरान जीतू हयारण, आशीष सरन, प्रांशू मोदनवाल, दीपू साहू, अखिलेश साहू, मोहन हलवाई, धीरेंद्र साहू भी मौजूद रहे।
प्रशासन और व्यापारी नेताओं की बैठक के बाद जो निर्णय लिया गया उस पर व्यापारियों ने टिप्पणी शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर तमाम लोग इस नियम को व्यापार का गला घोंटने वाला करार देते नजर आए।
प्रतिक्रिया व्यक्त करने वालों का साफ कहना रहा कि इससे व्यापार चौपट हो जाएगा। पटेल नगर चौराहे पर रेस्टोरेंट संचालक सोनू सिंह ने भी इस इस बारे में सोशल मीडिया पर तगड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उनकी इस पोस्ट पर कई व्यापारियों ने अपना समर्थन दिया।
चौक बाजार के कपड़ा कारोबारी जय कृष्ण रस्तोगी का कहना है कि प्रशासन और व्यापारी नेताओं के मध्य हुए समझौते से व्यापार का भला नहीं होगा। अच्छा होगा कि प्रशासन चार दिन दुकानें खोलने का निर्देश जारी करे ताकि व्यापार किया जा सके।
चौक के मच्छरदानी विक्रेता गुड्डूू मोदनवाल का कहना है कि गुरुवार को बंदी का निर्णय पूरी तरह से गलत है। हफ्ते में सिर्फ दो दिन दुकानें खोलने का मौका मिलेगा। 15 दिन का लॉकडाउन लगा दिया जाए या चार दिन व्यापार करने दिया जाए।
चौक बाजार में जनरल स्टोर संचालक बीनू गुप्ता का कहना है कि गुरुवार की प्रशासनिक बैठक में जो व्यापारी नेता पहुंचे उनमें किसी के पास दुकान नहीं है। ऐसे में इन्हें व्यापारिक दर्द का सही आंकलन नहीं हो रहा है। दुकानें हफ्ते में चार दिन तो खुलें।
चौक बाजार के फुटवियर विक्रेता मोहम्मद मुसर्रफ का कहना है कि प्रदेश सरकार ने दो दिन का लॉकडाउन लगा दिया है तो साप्ताहिक बाजार बंदी करने का कोई औचित्य नहीं बनता है। फिर भी चार दिन तो लगातार दुकानें खुलनी चाहिए।
व्यापारियों की समस्याओं को दूर कराने और उनके हक की लड़ाई लड़ने का दंभ भरने वाले एक नहीं छह व्यापार मंडल के नेता गुरुवार को डीएम-एसपी के साथ हुई बैठक में एक राय तक कायम नहीं कर पाए।
नतीजतन, ऐेसे नियम लागू कर दिए गए जिनका अब विरोध हो रहा है। व्यापारियों का गुस्सा देख संगठन के नेता भी बैकफुट पर हैं।
जिला प्रशासन के सामने सहमति जताने वाले व्यापारी नेताओं ने भी माना कि इस फैसले से व्यापार का बंटाधार हो जाएगा। व्यापारी क्या कमाएगा, क्या खाएगा और क्या कर्मचारी को देगा। बिजली बिल समेत अन्य खर्च कैसे निकालेगा।
जिले में फतेहपुर आदर्श व्यापार मंडल उप्र, उद्योग व्यापार मंडल उप्र, जिला उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल (कंछल गुट), जिला उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल (श्याम बिहारी गुट), उद्योग व्यापार मंडल (पंजीकृत) और सर्व वैश्य समाज जैसे छह प्रमुख व्यापारी संगठन हैं।
गुरुवार को इक्का दुक्का संगठनों को छोड़ दें तो सभी को बाजार बंदी की बैठक में बुलाया गया था लेकिन व्यापारियों की समस्याओं पर ही यह लोग एकजुट नहीं दिखे और एक दूसरे के प्रस्ताव का ही विरोध करने में जुटे रहे। इसका नतीजा रहा कि प्रशासन ने हफ्ते में तीन दिन बाजार बंदी का निर्देश जारी कर दिया जो व्यापारियों की समस्या बन गया है।
यह निर्णय गलत है। सिर्फ शासन का लॉकडाउन रखा जाए। इससे व्यापारियों के समक्ष दिक्कत आएगी। वह महीने भर का दुकान का किराया और तनख्वाह देंगे जबकि व्यापार आठ दिन का करेंगे। इस बारे में हम जनप्रतिनिधि से भी बात करेंगे। प्रदीप गर्ग, संस्थापक अध्यक्ष, आदर्श व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश
गुरुवार की साप्ताहिक बंदी उचित नहीं है। सही बात तो यह है कि प्रशासन के आगे पीछे घूमने वाले व्यापार चौपट करने में लगे हैं। इस नियम से सप्ताह में व्यापारियों को सिर्फ दो दिन ही दुकानें खोलने का मौका मिल सकेगा। - अजय अवस्थी, जिलाध्यक्ष, उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल(मिश्रा गुट)
प्रशासन का यह तुगलकी फरमान है। जब प्रदेश स्तर पर दो दिन का लॉकडाउन लगाया जा चुका है तो प्रशासन को स्थानीय स्तर पर बंदी नहीं करनी चाहिए। नए नियम से व्यापारी को केवल दो दिन दुकान खोलने को मिलेगी। - रवि प्रकाश दुबे, प्रदेश अध्यक्ष, जिला उद्योग व्यापार मंडल पंजीकृत
तीन दिन की पूर्णरूपेण बंदी प्रशासन ने व्यापारिक सहमति से लागू की है। टे्ड वाइज में दिक्कतें आ रही थीं। इसलिए पटरी वाइज दुकानें खोलने का नियम लागू किया गया है। तीन दिन में नुकसान तो है लेकिन स्थितियां भी तो गंभीर हैं। - राजेंद्र त्रिवेदी, प्रांतीय उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल
प्रशासन के फैसले से व्यापारियों में असमंजस की स्थिति है। आक्रोश भी है। इस मामले में संगठन प्रशासन से मुलाकात करके पांच दिन बाजार खोले जाने की बात रखेगा। अगर ऐसा नहीं हो सकता है तो चौदह दिन का लॉकडाउन कर दिया जाए। किशन मेहरोत्रा, संस्थापक अध्यक्ष, उद्योग व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश
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जो दुकानें खुलने का नियम बनाया गया है, वह गलत है। प्रदेश की गाइड लाइन के मुताबिक जिले के बाजार खोले जाएं। इस नियम से तो व्यापारी पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा। उन्होंने भाजपा जिलाध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग की। - राम प्रकाश गुप्ता, जिलाध्यक्ष, सर्व वैश्य समाज
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