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only mother can impart good education to child

Mon, 29 Dec 2014 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
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भागवत प्रचार परिषद की ओर से आयोजित समारोह में कथा के तीसरे दिन कथा वाचक हर नारायण जी महाराज ने कहा कि माताएं बच्चों को दें ध्रुव जैसे संस्कार दें। कहा कि ध्रुव को भगवान का दर्शन वास्तव में माता द्वारा पुत्र को दिए गए संस्कारों का परीक्षण है, जिसमें माता सुनिति खरी उतरी।
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माता सुनीति की कथा गृहस्थ जीवन की महिलाओं को यह प्रेरणा देती हैं कि बच्चों में उचित संस्कारों का निर्माण कर ध्रुव जैसा पुत्र बनाया जा सकता है।
कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि माता सती को भगवान पर संदेह हो गया। अर्थात तर्क  और परीक्षा से भगवान को जानना चाहा। इसीलिए भगवान शंकर द्वारा सती त्याग सर्व विदित है।

व्यक्ति को अपने ऊपर संदेह करना तो उचित है किंतु लोग अपने को उचित मानते हुए भगवान पर संदेह कर बैठते हैं। भगवान तो कपट और आडंबर को दूर करने वाले हैं।

आचार्य ने कहा कि मनु के पुत्र राजा उत्तान पाद प्रजा और समाज की उपेक्षा कर केवल काम वासना से प्रेरित होकर पत्नी सुख में लगे रहे वैसे तो काम भगवान का स्वरूप है किंतु काम का अतिक्रमण करने वाला संसार में अपयश पाता है।
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शायद इसीलिए उत्तान पाद को यश नहीं मिला। 
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