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प्याज के दाम से बिगड़ी थाली

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फतेहपुर में प्याज का तड़का काफी महंगा हो चला है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सब्जी मंडी में स्थानीय प्याज नदारद है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में भारी बरसात के चलते प्याज की आवक नहीं हो पा रही है।
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एक पखवारे के अंदर ही प्याज के दाम में 30 से 40 रुपये प्रति किलो का इजाफा हो चुका है। जो हालात हैं, उन्हें देखते हुए हाल फिलहाल दाम पर नियंत्रण की बात बेमानी नजर आ रही है। आमजन का मानना है कि सरकार ने प्याज के भंडारण की सीमा तय करने की पहल की है बशर्ते इस पर मुस्तैदी से काम भी हो। स्थानीय मंडी में प्याज की आवक और खपत की स्थिति बयां करती एक रिपोर्ट -
उपभोक्ता मामलों की सचिव लीला नंदन ने प्याज के दामों में हो रही बढ़ोतरी को नियंत्रित करने की दिशा में जो निर्देश जारी किए हैं। जिसमें थोक व्यापारी को 25 टन और खुदरा व्यापारी को दो टन प्याज भंडारण की छूट दी गई है।
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देखा जाए तो यह निर्देश समय की दरकार हैं क्योंकि तमाम प्याज के कारोबारियों ने इसे बड़ी तादाद में भंडारित कर रखा है। हालात यह है कि मौजूदा वक्त शहर में 100 बोरी प्याज की खपत हो रही है जो कि पहले दूनी तक थी।
गुरुवार को फुटकर बाजार में प्याज के दाम 60 रुपये प्रति किलो थे। शुक्रवार यह बढ़कर 70 रुपये पहुंच गए। शनिवार को 80 रुपये प्रति किलो तक बिका। यही वजह रही कि ज्यादातर खरीदार ढाई सौ ग्राम या फिर आधा किलो प्याज की तौल कराते देखे गए।
जिले में प्याज का उत्पादन एक हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल पर होता है। एक हेक्टेयर में ढाई सौ से तीन सौ कुंतल प्याज की पैैदावार होती है। इस तरह से एक सीजन में 30 हजार क्विंटल के आसपास प्याज की पैदावर होती है। हसवा, भिटौरा, हथगाम, ऐरायां, विजयीपुर, खजुहा व देवमई ब्लाक में प्याज उत्पादन होता है।
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