सावन के पहले सोमवार पर भक्तों में भोले बाबा के दर्शन करने के लिए उत्साह है। शहर के प्रसिद्ध तांबेश्वर मंदिर समेत जनपद के करीब दो दर्जन शिवालयों में रविवार रात तक तैयारियां पूरी कर ली गईं। मंदिरों की साफ-सफाई व बैरीकेडिंग की व्यवस्था की गई है।
शहर के प्रसिद्ध तांबेश्वर मंदिर में भक्तों की सबसे अधिक भीड़ लगती है। इसको लेकर सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम भी किए गए हैं। शहर ही नहीं बल्कि दूसरे जनपदों से भी भक्त पूजा अर्चना करने आते हैं। मंदिर के पास विशाल मेला लगता है जिसमें जगह जगह भंडारे के आयोजन होते हैं। मंदिर के मुख्य गेट में महिला
और पुरुष के लिए अलग अलग बैरीकेडिंग बनाई गई है। सावन के सोमवार को भक्त भृगुधाम भिटौरा के ओमघाट में गंगा स्नान करने आएंगे। मंदिर के पुजारी आचार्य राघवेंद्र पांडेय ने बताया कि सावन के सोमवार को भक्तों की भीड़ रहेगी। मंदिर गेट के पास बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है जिससे भक्त आराम
से महादेव के दर्शन कर सकें।
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फतेहपुर। आचार्य पंडित केके पांडेय ने बताया कि शिव जी जटाओं में गंगाजी को धारण करने वाले, सिर पर चंद्रमा को सजाने वाले, मस्तक पर त्रिपुंड तथा तीसरे नेत्र वाले रुद्र, माला से सुशोभित, हाथ में डमरू और त्रिशूल है। महादेव भक्तों की हर विघ्न बाधा को हर लेते हैं।
फतेहपुर। आचार्य पंडित कृष्ण दत्त अवस्थी ने बताया कि सावन के सोमवार में शिव की आराधना का विशेष महत्व होता है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं और सारी रात मंदिरों में भगवान शिव का भजन होता है। औरतों के लिये विशेष रुप से शुभ माना जाता है, क्योकि एक कथा है कि पार्वती ने तपस्या की और प्रार्थना
की जिस पर शिव जी पति के रूप में मिले। शिवलिंग में जलाभिषेक कर औरतें अपने पति और पुत्र का शुभ मांगती हैं। लड़कियां भगवान शिव का पूजन करती हैं कि उन्हें अच्छा पति मिले।
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जनपद के प्रसिद्ध शिवालय
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- शहर के तांबेश्वरपुरम स्थित तांबेश्वर मंदिर
- कृष्ण बिहारी नगर स्थित मोटे महादेव मंदिर।
- जीटी रोड स्थित बड़े शिवाला मंदिर।
- लालाबाजार स्थित मुनि का शिवाला मंदिर।
- बिंदकी के जंगल इलाके में स्थित डूडेश्वर बाबा मंदिर।
- बिंदकी के गांधी चौराहे में बाबा कुटी का प्राचीन शिव मंदिर।
- बिंदकी के महाजरी गली का प्राचीन शिव मंदिर
- अमौली के अरगल के जंगल में स्थित अरगेश्वर धाम।
- चांदपुर के गूढ़ेश्वर बाबा मंदिर।
- खजुआ ब्लाक के गहरूखेड़ा में भर्थरी बाबा मंदिर।
- खजुहा के लालपुर मडऱांव में सिद्धेश्वर धाम।
- खागा के मझिल गांव में कुंडेश्वर धाम।
- खागा के कस्बा सोहन स्थित शिव मंदिर।
- खागा पक्का तालाब स्थित शिव मंदिर
- खागा के शाहीपुर, सेलरहा, अन्ना भैरव, कबरहा स्थित शिव मंदिर
- भृगुधाम भिटौरा के ओम घाट का विशाल शिवलिंग।
- बहुआ के कीर्तिखेड़ा में स्थित थवईश्वर धाम।
- असोथर के बुधरामऊ गांव के पास स्थित जागेश्वर बाबा मंदिर।
- असोथर कस्बे में स्थित मोटेमहादेव मंदिर।
सावन के सोमवार में व्रत करने से और पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। इस दिन जो भगवान शिव की पूजा करता है, उसे भूत प्रेत की पीड़ा, ग्रहों से होने वाली दिक्कतें दूर होती हैं। सावन के सोमवार को ऐसे करें शिव जी की पूजा अर्चना। पूजा करते समय सबसे पहले मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर ऊपर से बेलपत्र, धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। वहीं अगर घर के आसपास में शिवालय न हो तो शुद्ध गीली मिट्टी से ही शिवलिंग बनाकर भी उसे पूजा जा सकता है। वहीं इस दिन शिवपुराण का पाठ सुनना चाहिए और पाठ करना चाहिए। शिव पुराण में सावन के सोमवार को दिन रात पूजा के बारे में कहा गया है और चार पहर दिन में शिवालयों में जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर बेलपत्र चढ़ाने से शिव की अनंत कृपा प्राप्त होती है। कई लोग चार पहर की पूजा भी करते हैं, जिसमें बार बार शिव का रुद्राभिषेक करना होता है। चारों पहर के पूजन में शिवपंचाक्षर ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्र, महान, भीम और ईशान इन आठ नामों से फूल अर्पित कर भगवान शिव की आरती व परिक्रमा करें। अगर व्रत नहीं किया है तो सामान्य पूजा अवश्य करनी चाहिए। जिसमें शिवलिंग को पवित्र जल, दूध और मधु से स्नान करवाएं। भगवान को बेलपत्र अर्पित करें। इसके बाद धूप बत्ती करें। फिर दीपक जलाएं। ऐसा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं।