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रास्ते में कब्जे के विरोध पर बुजुर्ग की हत्या

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राम सजीवन की फाइल फोटो - फोटो : FATEHPUR
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कब्जे का विरोध करने पर वृद्ध किसान की हत्या
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हुसैनगंज(फतेहपुर)। जमीन पर अवैध निर्माण का विरोध करने पर एक पक्ष ने रविवार सुबह बुजुर्ग किसान पर हमला कर दिया। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। चार लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई है।
थाना क्षेत्र के शत्रुघ्नपुर गांव निवासी रामसजीवन यादव (75) रविवार सुबह दरवाजे पर लेटे थे। उनके बेटे नरेश, रमेश, अवधेश, सर्वेश, नरेंद्र धान लगाने खेत गए थे। इधर, कोमल, सुरेश, नरपत, नरेंद्र यादव विवादित जगह पर निर्माण कराने लगे। इस जमीन को लेकर 15 दिन पहले पंचायत में समझौता हुआ था। तय हुआ था कि इस पर कोई निर्माण नहीं होगा।
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इसके बाद भी दूसरे पक्ष को निर्माण कराते देख रामसजीवन की बहू संगीता पहुंची और विरोध किया। आरोपी कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हुए और गाली देने लगे। इस पर रामसजीवन पहुंचे और बहू को गाली देने का विरोध किया। संगीता के मुताबिक ससुर के बोलने पर आरोपी लाठी-डंडे लेकर आ गए और उन पर हमला कर दिया।
उनका गला दबाने के बाद धक्का दे दिया। वह खड़ंजे पर जा गिरे। वह दौड़कर वहां पहुंची तो उनकी मौत हो चुकी थी। थानेदार निशिकांत राय ने बताया कि बेटे नरेंद्र सिंह की तहरीर पर चारों आरोपियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
एक बिसवा जमीन के विवाद में चली गई जान
फतेहपुर। हुसैनगंज थाने के शत्रुघ्नपुर गांव में महज एक बिसवा जमीन के विवाद में बुजुर्ग की जान चली गई। जमीन पर कब्जे का एक साल से विवाद चल रहा था। पंचायत के बाद भी मामला हल नहीं हो सका था। दोनों पक्ष के लोग इस जमीन के दावेदार थे। पुलिस ने कई लोगों को पूछताछ के लिए पकड़ा है।
शत्रुघ्नपुर गांव के दोनों परिवार सामान्य वर्ग के हैं। गांव में हत्या की खबर पर सीओ सिटी केडी मिश्रा, हुसैनगंज थानेदार निशिकांत राय, हथगाम थानेदार आदित्य सिंह समेत भारी फोर्स पहुंची। ग्रामीणों ने आरोपियों को पकड़े जाने की मांग की। सीओ सिटी ने कार्रवाई का आश्वासन देकर शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
मृतक के बेटे अवधेश ने बताया कि चार साल पहले दूसरे पक्ष के एक व्यक्ति ने खेत में घर बनाया था। उसे रास्ते के लिए अपनी जमीन तक दी थी। घर के सामने एक बिसवा जमीन में सालों से मवेशी बांधते थे। कुछ दिनों के लिए मवेशी नहीं थे। तभी दूसरे पक्ष को व्यवहारिक तौर पर जमीन इस्तेमाल करने को दी थी। पिछले साल भी आरोपी पक्ष ने जमीन पर निर्माण की कोशिश की थी। इस साल फिर से 15 दिन पहले निर्माण चालू किया था।
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इसे पंचायत के बाद रुकवा दिया था। प्रधान गिरिजाशंकर मौके पर आए थे। उन्होंने घर के रास्ते के लिए खड़ंजा लगवाने को कहा था। इससे विवाद खत्म हो जाता। प्रधान ने खड़ंजा निर्माण नहीं कराया तो आरोपी पक्ष ने रविवार को दोबारा निर्माण शुरू कराया। इसका पिता रामसजीवन ने विरोध किया और उनकी जान चली गई ग्राम प्रधान बताया कि जमीन ग्राम समाज की है।
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